बांग्लादेश में इस समय हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी वहां हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल के दिनों में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।
आरोप है कि मौजूदा सरकार हिंसा पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने में असफल रही है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में कई हिंदू नागरिकों की हत्या की घटनाएं सामने आई हैं। दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद अब अमृत मंडल उर्फ सम्राट की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद भी लगातार वहां पर हालात गंभीर बने हुए है।
बढ़ती हिंसा के बीच दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या ने पूरे बांग्लादेश, खासकर हिंदू समुदाय में, डर का माहौल पैदा कर दिया है और लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं।इस हत्याकांड के एक चश्मदीद ने निजी टीवी चैनल से बातचीत में जो खुलासे किए हैं, उनसे बांग्लादेश की बिगड़ती स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। चश्मदीद ने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या करने वाले लोग इंसान नहीं, राक्षस बन चुके थे।
घटना वाले दिन दीपू चंद्र दास को फैक्ट्री के HR विभाग में बुलाया गया, जहां उससे जबरन इस्तीफा लिखवाया गया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, उस वक्त वहां सिर्फ फैक्ट्री के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बाहर से आए कुछ संदिग्ध लोग भी मौजूद थे। इसके बाद दीपू को फैक्ट्री गेट के बाहर खड़ी भीड़ के हवाले कर दिया गया, जहां पहले से हिंसा के लिए तैयार कट्टरपंथी जमा थे।
जैसे ही वह बाहर आया, भीड़ ने उस पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों और घूंसे से बेरहमी से पीटा गया, चेहरे और शरीर पर लगातार वार किए गए, जिससे वह खून से लथपथ हो गया। लेकिन हिंसा यहीं नहीं थमी।
प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, दीपू चंद्र दास को करीब एक किलोमीटर तक घसीटा गया, फिर एक पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया गया। यह पूरी वारदात खुलेआम अंजाम दी गई, लेकिन दहशत के कारण कोई भी व्यक्ति आगे आकर उसे बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।