मुंबई से सटे बदलापुर में पुलिस ने एक ऐसे ‘ब्लैक मार्किट’ का पर्दाफाश किया है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। ये कहानी ‘बॉडी ट्रैफिकिंग’ के उस घिनौने रूप को उजागर करती है जहाँ गरीब महिलाओं की जान की कीमत सिर्फ 25 हज़ार रुपए लगाई गई।
कैसे चलता था ये खौफ
किचन बना था इनका ‘सर्जीकल रूम’ और इस गिरोह की मास्टरमाइंड “सुलक्षणा गाडेकर”” ने अपने ही घर को एक अवैध क्लीनिक में तब्दील कर दिया था। तरीका बहुत शातिराना और खौफनाक था:
आर्थिक रूप से कमजोर और कर्ज में डूबी महिलाओं को 25,000 रुपए से 30,000 रुपए का ‘इंस्टेंट कैश’ ऑफर किया जाता। बिना किसी मेडिकल डिग्री के, सुलक्षणा गाडेकर इन महिलाओं को हाई-डोज Hormonal Injections लगाती थी ताकि उनके शरीर में तय सीमा से कई गुना ज्यादा अंडे तैयार हों और कानून से बचने के लिए जाली आधार कार्ड और फर्जी एफिडेविट का एक पूरा जाल बिछाया गया था। जब ‘स्टॉक’ तैयार हो जाता, तो ये गिरोह नामी IVF सेंटर्स के साथ मिलकर लाखों का सौदा करता था।
33 बार मौत से सामना
मेडिकल साइंस और भारत का ART Act 2021 साफ कहता है कि एक महिला अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ 1 बार एग डोनेट कर सकती है। लेकिन इस रैकेट की हैवानियत देखिए—एक महिला से 33 बार अंडे निकलवाए गए!
बार-बार दिए गए इन इंजेक्शनों से किडनी फेलियर और OHSS (ओवेरियन हाइपर-स्टिमुलेशन सिंड्रोम) का खतरा होता है। ये महिलाएं हर बार चंद रुपयों के लिए अपनी मौत से हाथ मिला रही थीं।
पुलिस की रडार पर ‘सफेदपोश’ डॉक्टर?
ठाणे पुलिस की टीम ने जब जोवेली इलाके के उस फ्लैट पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयां और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं और पुलिस अब उस इंटरनेशनल लिंक को खंगाल रही है, जहाँ इन अंडों की सप्लाई की आशंका है।