असम सोनमिलितो मोर्चा गठबंधन 2026 चुनाव
गुवाहाटी की सियासत में बुधवार शाम बड़ा धमाका हुआ, जब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सात प्रमुख विपक्षी दलों के साथ मिलकर नया गठबंधन “असम सोनमिलितो मोर्चा (ASM)” बनाने का ऐलान किया. यह गठबंधन सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की बीजेपी सरकार को चुनौती देगा. गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “असम की जनता बीजेपी की क्रूरता और भ्रष्टाचार से त्रस्त है. अब समय है बदलाव का.”
इस नए मोर्चे में कांग्रेस के साथ AIUDF, BPF, AJSU, WPP, RJP, AGP का एक धड़ा और लेबर पार्टी ऑफ इंडिया शामिल हैं. गौरव गोगोई, जो पूर्व मुख्यमंत्री तारुण गोगोई के बेटे हैं, ने कहा कि “2026 में हम असम को बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति से आज़ाद करेंगे.”
‘बीजेपी की क्रूरता’ के खिलाफ एकजुट विपक्ष
विपक्षी दलों का आरोप है कि हिमंता सरकार ने असम में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है. गोगोई ने कहा कि “ED, CBI और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को डराने की कोशिश की जा रही है.” AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने भी कहा, “यह गठबंधन असम को बीजेपी के फासीवादी शासन से बचाने के लिए बना है.”
यह वही ASM गठबंधन है जिसने 2021 के चुनावों में 39 सीटें जीती थीं, लेकिन आंतरिक कलह से कमजोर पड़ गया था. अब गोगोई के नेतृत्व में इसे पुनर्जीवित किया गया है, और सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो चुका है — कांग्रेस को 60% सीटें, बाकी दलों को बराबर हिस्सा.
2026 के चुनाव पर असर और राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन बीजेपी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है, खासकर बोडोलैंड और मुस्लिम बहुल इलाकों में. अगर ASM एकजुट रहा, तो 2026 का असम चुनाव न सिर्फ़ रोमांचक, बल्कि बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है.
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