असम निकाय चुनाव मेंबीपीएफ की वापसी
असम में हुए निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है. शुरुआती नतीजों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने लगभग पांच साल बाद सत्ता की ओर वापसी करते हुए मजबूत बढ़त बनाई है. 40 सीटों वाले इस चुनाव में बीपीएफ ने 19 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है, जबकि बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत होती है. भाजपा सिर्फ 13 सीटों पर आगे है. वहीं, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) को 8 सीटों पर बढ़त मिली है, जबकि कांग्रेस का खाता अब तक नहीं खुला है. बता दें कि इस बार भाजपा ने चुनाव अकेले लड़ा था. 22 सितंबर को हुए मतदान में कुल 316 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. शुरुआती रुझानों से साफ है कि बीपीएफ फिर से क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत वापसी कर रही है.
भाजपा ने दिए संकेत, बीपीएफ को मिल सकता है समर्थन
असम निकाय चुनाव के बीच सियासी समीकरण भी तेजी से बदलते दिख रहे हैं. शुरुआती नतीजों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. ऐसे में भाजपा नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी, बीपीएफ को समर्थन देकर परिषद में सरकार बनाने का रास्ता खोल सकती है. हालांकि भाजपा ने साफ किया है कि अंतिम नतीजों का इंतजार करना जरूरी है, क्योंकि इस बार जनादेश बिखरा हुआ है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद कई दिनों तक जोरदार प्रचार किया था, लेकिन परिणाम उम्मीदों के मुताबिक नहीं दिख रहे.
2020 में क्या हुआ था?
साल 2020 के चुनाव में भी बीपीएफ 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. इसके बावजूद भाजपा और यूपीपीएल के गठबंधन ने परिषद में सरकार बना ली थी. तब भाजपा ने 24 सीटों पर चुनाव लड़कर 9 सीटें जीती थीं. इस बार पार्टी ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन बढ़त सिर्फ 13 पर ही सिमट गई. वहीं, वर्तमान में परिषद चला रही यूपीपीएल को इस बार महज 8 सीटों पर बढ़त मिली है, जबकि उसने 40 में से सभी सीटों पर दावेदारी की थी.
बीपीएफ का सियासी सफर
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट का राजनीति में उतार-चढ़ाव भरा सफर रहा है. साल 2006 और 2011 में बीपीएफ कांग्रेस सरकार का हिस्सा रही. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उसने कांग्रेस से दूरी बना ली. 2021 विधानसभा चुनाव में बीपीएफ ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, लेकिन बाद में एनडीए सरकार को समर्थन दे दिया.
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