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बंगाल में ‘असम मॉडल’ लागू: घुसपैठियों के लिए जिलों में बनेंगे होल्डिंग सेंटर,शुभेंदु सरकार का बड़ा प्रशासनिक आदेश

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों और घुसपैठ के मुद्दे पर राज्य की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। असम की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को रखने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ (डिटेंशन सेंटर) बनाए जाएंगे।

राज्य के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने 23 मई 2026 को राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से जमीन और जगह चिह्नित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस फैसले के बाद से ही सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

कोर्ट-कचहरी नहीं, सीधे डिपोर्टेशन की तैयारी

इस नई नीति के तहत सरकार पहचान और वापसी (Deportation) की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने जा रही है। अब तक पकड़े गए संदिग्धों को लंबी कानूनी प्रक्रिया, जेल और कोर्ट के चक्करों में डाला जाता था, लेकिन अब रणनीति बिल्कुल अलग है:

  • सीधे BSF को सौंपने का निर्देश: प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पकड़े गए घुसपैठियों को अब सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) की चौकियों को सौंपा जाएगा ताकि उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज हो सके।
  • रेलवे और मेट्रोपॉलिटन बेल्ट पर नजर: कोलकाता पुलिस कमिश्नर और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) को भी सतर्क कर दिया गया है। स्टेशनों और ट्रेनों में विशेष चेकिंग अभियान चलाकर संदिग्धों की पहचान की जाएगी।

क्या है यह ‘होल्डिंग सेंटर’ मॉडल?

यह व्यवस्था काफी हद तक असम के ‘हिमंता बिस्वा सरमा मॉडल’ से प्रेरित दिखती है। इसके तहत:

  1. जेलों से अलग व्यवस्था: ये सेंटर सामान्य जेलों से बिल्कुल अलग होंगे।
  2. किन्हें रखा जाएगा: जिन विदेशी नागरिकों के पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे और जो विदेशी कैदी अपनी सजा पूरी करने के बाद स्वदेश वापसी (Deportation) का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें इन सेंटरों में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाएगा।

“प्रशासनिक अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में सुरक्षित स्थानों की पहचान कर इन सेंटरों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करें, ताकि पहचान और हिरासत की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।”प्रशासनिक सूत्र

सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय

इस आदेश का सबसे व्यापक असर पश्चिम बंगाल के उन जिलों में देखने को मिल रहा है जिनकी सीमाएं अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से लगती हैं। इन संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है:

  • उत्तर 24 परगना
  • दक्षिण 24 परगना
  • मुर्शिदाबाद
  • मालदा
  • नादिया

इन क्षेत्रों में पहले भी फर्जी निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों के सहारे अवैध नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं।

राजनीतिक घमासान: सुरक्षा बनाम मानवाधिकार

इस फैसले ने बंगाल की पहले से ही संवेदनशील राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। जहां सत्तापक्ष (भाजपा) इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा एक ऐतिहासिक और अनिवार्य कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता व्यक्त की है।

आलोचकों का तर्क है कि इस कड़े कानून की आड़ में वैध दस्तावेज न रख पाने वाले गरीब स्थानीय नागरिकों या प्रवासी मजदूरों को निशाना न बनाया जाए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी होगी और केवल उन्हीं पर शिकंजा कसा जाएगा जिनकी नागरिकता और दस्तावेज जांच में पूरी तरह संदिग्ध पाए जाएंगे।

news desk

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