नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और आर्थिक तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर सोमवार को तेहरान पहुंचे। उनके साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी हैं। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, यह दौरा क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रयासों का हिस्सा है।
लेकिन मुनीर के तेहरान पहुंचने से पहले हुई एक ऐसी बातचीत ने इस दौरे को और अहम बना दिया है, जिसकी जानकारी अब सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह असीम मुनीर से फोन पर बात की थी। तीन पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने पाकिस्तान से ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा था।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप और मुनीर के बीच हुई यह बातचीत पहले सार्वजनिक नहीं हुई थी। कॉल की पहल ट्रंप की ओर से हुई थी, हालांकि व्हाइट हाउस ने इस बातचीत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह फोन ऐसे समय आया जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने उन देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है जो ईरान को किसी तरह की आर्थिक मदद या राहत देते हैं। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के दबाव के जवाब में खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने मुनीर की यात्रा को क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के प्रयासों से जोड़ा है। पाकिस्तान ने भी इसे अपने ‘गुड ऑफिसेज’ यानी मध्यस्थता प्रयासों का हिस्सा बताया है।
तेहरान में मुनीर की ईरानी नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका-ईरान तनाव को कम करने के प्रयासों पर बातचीत होने की उम्मीद है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती समूह के सऊदी अरब पर हमले और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े दूसरे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं।
इस समय सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की बहाली है। दोनों देशों के बीच महीनों से जारी संघर्ष और तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ता लगभग ठहर गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों पक्ष फिलहाल न तो सीधे सैन्य टकराव में हैं और न ही सक्रिय शांति वार्ता आगे बढ़ा रहे हैं।
पाकिस्तान इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में भूमिका निभा चुका है। जून में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझ बनाने की कोशिश हुई थी, लेकिन वह ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रह सकी। ऐसे में मुनीर की मौजूदा यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य फिर से बातचीत का रास्ता खोलना माना जा रहा है।
मुनीर का तेहरान दौरा उस दिन हो रहा है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा करने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक दबाव की बात कही है।
दूसरी तरफ, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाया गया तो वह खाड़ी से होने वाले तेल निर्यात को रोकने की दिशा में कदम उठा सकता है। इससे पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है।
असीम मुनीर की तेहरान यात्रा सिर्फ अमेरिका और ईरान के लिए ही अहम नहीं है। यह पाकिस्तान के लिए भी अपनी क्षेत्रीय कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का मौका है। इस्लामाबाद के ईरान के साथ पुराने संबंध हैं और वह पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थता की कोशिश कर चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप के संदेश के साथ तेहरान पहुंचे असीम मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ पिघला पाएंगे? अगर पाकिस्तान बातचीत का रास्ता दोबारा खोलने में सफल होता है तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है, बल्कि खाड़ी में तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहा दबाव भी कुछ कम हो सकता है।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और दिग्गज क्रिकेटर इमरान खान की स्थिति को लेकर…
नई दिल्ली। रूस और भारत के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर सोमवार को मॉस्को से…
आरक्षण के मुद्दे को लेकर चल रही बहस अब सोशल मीडिया से निकलकर कानूनी विवाद…
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र से शुक्रवार को एक ऐसा मामला…
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के…
श्रीनगर। जम्मू में रह रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को कथित तौर पर धमकी दिए जाने…