नई दिल्ली। आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल की दौड़ में “फाइबर” को सुपरफूड का दर्जा मिल चुका है। फल, सब्जियां, ओट्स और सलाद हर प्लेट में फाइबर जोड़ने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ज्यादा फाइबर लेना सच में सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद है, जितना बताया जाता है?
विशेषज्ञों की मानें तो फाइबर जरूरी जरूर है, लेकिन इसकी अधिकता शरीर के लिए नई समस्याएं भी खड़ी कर सकती है।
फाइबर: फायदा या फैशन?
फाइबर एक ऐसा कार्बोहाइड्रेट है जो पूरी तरह पचता नहीं, बल्कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह दो प्रकार का होता है घुलनशील और अघुलनशील, और दोनों ही शरीर के लिए अहम हैं।
लेकिन आजकल लोग “ज्यादा फाइबर = ज्यादा हेल्थ” के फार्मूले पर चल रहे हैं, जो हर बार सही नहीं होता।
जब फाइबर बन जाए परेशानी
जरूरत से ज्यादा फाइबर लेने पर शरीर तुरंत संकेत देने लगता है
पेट में गैस और सूजन: ओवर फाइबर से ब्लोटिंग और दर्द बढ़ सकता है
पोषक तत्वों की कमी: आयरन, जिंक और कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित हो सकता है
डिहाइड्रेशन का खतरा: पर्याप्त पानी न पीने पर कब्ज और पानी की कमी बढ़ सकती है
सही बैलेंस है असली गेम
एक स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना 25–35 ग्राम फाइबर पर्याप्त माना जाता है। इससे ज्यादा लेने की बजाय संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है।
फाइबर बढ़ाते समय ये 3 बातें याद रखें
- धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं
- खूब पानी पिएं
- अलग-अलग स्रोतों से फाइबर लें
नया नजरिया: ‘कम नहीं, सही’ फाइबर
डॉक्टर्स अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि फाइबर की मात्रा नहीं, बल्कि उसका संतुलन ज्यादा मायने रखता है। हर शरीर की जरूरत अलग होती है, इसलिए डाइट को “ट्रेंड” नहीं, बल्कि “जरूरत” के हिसाब से अपनाना ही समझदारी है।
फाइबर सेहत का दोस्त है, लेकिन तभी तक जब तक वह संतुलन में हो। जरूरत से ज्यादा फाइबर, फायदे की जगह नुकसान भी दे सकता है—इसलिए “ज्यादा” नहीं, “सही” फाइबर चुनें।
अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। यह किसी भी प्रकार से योग्य चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी या किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। indianpresshouse.com इस जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की जिम्मेदारी नहीं लेता है।