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अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी का दारुल उलूम देवबंद दौरा, भारत-अफगान रिश्तों का क्या है भविष्य?

सहारनपुर: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी शनिवार को सहारनपुर जिले के प्रतिष्ठित दारुल उलूम देवबंद पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस दौरान उन्होंने दारुल उलूम के मोहतमिम (VC) मुफ्ती अब्दुल कासिम नोमानी मौलाना, मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की मुत्ताकी ने दारुल उलूम को इस्लाम का ऐतिहासिक केंद्र बताते हुए कहा कि अफगानिस्तान में भी इसी मसलक के अनुयायी मौजूद हैं. उन्होंने इस दौरे को दोनों देशों के पुराने और मजबूत रिश्तों को बढ़ाने वाला करार दिया.

दारुल उलूम पहुंचे आमिर खान मुत्ताकी का स्वागत फूलों से किया गया. इस मौके पर उन्होंने कहा, “अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है. दारुल उलूम के लोग और क्षेत्र के सभी लोग जिन्होंने मेरा स्वागत किया, मैं उनका आभारी हूं.” उन्होंने अपने स्वागत के लिए दारुल उलूम के उलेमा और क्षेत्र के लोगों का विशेष धन्यवाद भी किया.

मुत्ताकी ने भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देशों का भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है. 2021 में सत्ता संभालने के बाद यह उनके भारत का पहला दौरा है. इस दौरे के दौरान उन्होंने शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी.

दारुल उलूम में दौरा और छात्रों से मुलाकात

इस दौरे में मुत्ताकी दारुल उलूम देवबंद के छात्रों से बातचीत करेंगे और संस्थान की ऐतिहासिक लाइब्रेरी का दौरा करेंगे, जिससे छात्रों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. उन्होंने दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अब्दुल कासिम

नोमानी और मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की और पूरे संस्थान का दौरा किया. मुत्ताकी ने मीडिया से कहा, “दारुल उलूम में आकर मुझे बेहद खुशी हुई. यहाँ जिस तरह स्वागत हुआ, वह सराहनीय है. मैं उम्मीद करता हूं कि भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते और मजबूत होंगे.”

भारत की तालिबान नीति और हालिया बदलाव

भारत की तालिबान नीति लंबे समय से रणनीतिक सतर्कता पर आधारित रही है. 1990-2001 में भारत ने तालिबान को मान्यता नहीं दी और उत्तरी गठबंधन का समर्थन किया, जबकि 2001-2021 में करजई और गनी सरकारों के साथ गहन सहयोग किया और 400 से अधिक परियोजनाओं में निवेश किया. 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने गैर-मान्यता और सीमित संपर्क के साथ मानवीय सहायता जारी रखी.

2021 के बाद नीति “सतर्क जुड़ाव” (cautious engagement) से विकसित हुई और अब यह गहन राजनयिक स्तर तक पहुंच गई, जिसका महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब भारत ने काबुल में अपने तकनीकी मिशन को दूतावास में अपग्रेड करने की घोषणा की, जो तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा (10 अक्टूबर 2025) के दौरान हुआ है और यह उनकी 2021 के बाद पहली आधिकारिक यात्रा है. इन बदलावों के प्रमुख कारणों में सुरक्षा (तालिबान-पाकिस्तान संबंध खराब और भारत के खिलाफ आतंकवाद न करने का आश्वासन), आर्थिक और क्षेत्रीय हित ($3 अरब निवेश को डूबने से बचाना , चाबहार बंदरगाह और INSTC, तालिबान की आर्थिक मदद की मांग), भू-राजनीति (चीन-रूस का बढ़ता प्रभाव, अमेरिका की गैर-प्रतिबद्धता, राष्ट्रीयतावादी तालिबान गुटों से चयनात्मक संपर्क) और मानवीय कारण शामिल हैं. 2022-2025 में यह नीति सतर्क जुड़ाव से विकसित होकर पूर्ण गहन राजनयिक संबंधों में बदल गई है.

धार्मिक और कूटनीतिक महत्व

मुत्ताकी का यह दौरा विशेष रूप से यह दौरा धार्मिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह पाकिस्तान के उस दावे को चुनौती देता है, जिसमें पाकिस्तान खुद को देवबंदी इस्लाम का संरक्षक और तालिबान का मुख्य समर्थक बताता है. मुत्ताकी की देवबंद यात्रा से यह संदेश जाता है कि तालिबान की धार्मिक जड़ों का दावा करने वाला अकेला पाकिस्तान नहीं है, और अफगानिस्तान अपनी राजनीति और कूटनीति में पाकिस्तान पर निर्भरता कम करके भारत की तरफ रुख कर रहा है.

news desk

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