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यूक्रेन पर अमेरिका की नई चाल: अब क्यों बदल गया दृष्टिकोण?

रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है, और दुनिया भर में इसे रोकने को लेकर बहस चल रही है. कई देशों ने युद्ध समाप्ति के प्रयास किए, लेकिन दोनों पक्ष अब भी लगातार एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं.

अमेरिका चाहता है कि जल्द दोनों देशों के बीच शांति स्थापित हो, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके. हालांकि, पुतिन और जेलेंस्की के बीच बातचीत मुश्किल बनी हुई है, जबकि अमेरिका ने अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को बदल दिया है.

पहले अमेरिका यूक्रेन को लगातार समर्थन देता था और रूस के खिलाफ हर संभव मदद प्रदान करता था. कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से संबंधित अमेरिकी सरकारी खर्च में से लगभग 128 बिलियन डॉलर सीधे यूक्रेन सरकार को सहायता के रूप में दिए गए. शेष राशि का अधिकांश हिस्सा युद्ध से जुड़ी अमेरिकी गतिविधियों और क्षेत्र के अन्य प्रभावित देशों को सहायता में गया.

ट्रंप प्रशासन के दौरान नीति में बदलाव आया. फरवरी 2025 में ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दोनों के बीच बहस दिखाई गई. इसके बाद अमेरिका ने 3 मार्च, 2025 को यूक्रेन को सैन्य और खुफिया सहायता देना रोक दिया, जिसे 11 मार्च को फिर बहाल किया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अब रूस से संबंध सुधारने पर जोर दे रहे हैं और इसी वजह से यूक्रेन के प्रति सख्त रवैया अपनाया गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अब लगातार विदेशी युद्धों में फंसना नहीं चाहता. उसके लिए प्राथमिकता युद्ध रोकना और अपनी सुरक्षा बनाए रखना है. इसी क्रम में अमेरिका ने 28 सूत्रीय शांति योजना पेश की और राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की को 27 नवंबर तक अल्टीमेटम दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर यूक्रेन इस शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिकी सैन्य और खुफिया मदद पर असर पड़ सकता है.

अमेरिका का 28 सूत्रीय शांति प्लान – मुख्य बिंदु

  1. यूक्रेन की संप्रभुता की गारंटी: अमेरिका शर्तों के साथ यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
  2. क्रीमिया, लुहान्स्क और डोनबास: प्लान में इन इलाकों पर रूसी कब्जे को मान्यता देने की बात शामिल है।
  3. सैन्य क्षमता सीमित करना: यूक्रेन की सैन्य ताकत को नियंत्रित करने का प्रस्ताव।
  4. आर्थिक प्रतिबंधों में ढील: रूस पर अमेरिका और यूरोप द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव।
  5. नाटो सदस्यता: यूक्रेन कभी भी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा।
  6. चुनाव का आयोजन: अगले 100 दिनों के भीतर यूक्रेन में चुनाव कराने का प्रस्ताव।
  7. सुरक्षा गारंटी: अमेरिका यूक्रेन को शर्तों के साथ सुरक्षा गारंटी देगा।
  8. पुनर्निर्माण और निवेश: यूक्रेन के पुनर्निर्माण और निवेश में अमेरिका को 50% लाभांश मिलेगा।
  9. हमले पर रोक और विवाद समाधान: रूस, यूक्रेन और यूरोप एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे, और पिछले 30 सालों के सभी मतभेदों का क्रमिक समाधान किया जाएगा।

.”कुल मिलाकर अब देखना होगा कि अमेरिका की इस नई रणनीति पर यूक्रेन कैसा रुख अपनाता है और क्या वह सभी शर्तें मानने को तैयार होगा.”

SYED MOHAMMAD ABBAS

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