नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। मंगलवार को अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हवाई हमला किया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी द्वीप पर कई हमले होने की पुष्टि की है। वहीं, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इस अभियान को छोटे स्तर पर और गोपनीय तरीके से अंजाम दिया, ताकि इसे बड़े सैन्य अभियान की दोबारा शुरुआत के तौर पर न देखा जाए।
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। दूसरी ओर, ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की योजना अगले दो दिनों में शुरू करने की बात कही थी।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, केशम द्वीप पर किया गया हमला रक्षात्मक कार्रवाई थी। उनका कहना है कि इसका मकसद ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमले करने से रोकना था।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका पिछले कई महीनों से कोई लड़ाई नहीं लड़ रहा है। यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब क्षेत्र में सैन्य तनाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता होने की उम्मीद भी जताई है।
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की योजना पर दिए गए संकेतों के बीच अमेरिकी हमले ने क्षेत्र की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
केशम द्वीप पर हमले की खबर के बाद मंगलवार को एशियाई बाजारों में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए। ब्रेंट क्रूड की कीमत 48 सेंट यानी 0.5 फीसदी बढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 47 सेंट यानी 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ 96.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा।
इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इसकी कीमत 8.66 डॉलर यानी 7.63 फीसदी टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई थी। ऐसे में अमेरिकी हमले के बाद बाजार में फिर तेजी देखने को मिली।
अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के आखिर में शुरू हुए संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। इस टकराव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि संघर्ष से पहले वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की करीब पांचवां हिस्सा आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी।
इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव की खबरों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के साथ समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य हमले शुरू करने को लेकर उनका अंतिम फैसला क्या होगा।
अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों और मतदाताओं पर पड़ रहा है। ऐसे में ईरान के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने का दबाव भी ट्रंप प्रशासन पर बढ़ रहा है। मंगलवार को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका ने तेल बाजार को प्रभावित किया।
इससे पहले अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड की कीमत छह महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुई थी। अब केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद बाजार की नजर इस बात पर है कि क्षेत्र में तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट से तेल तथा गैस की आपूर्ति कब सामान्य हो पाती है।
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