वाशिंगटन/इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट (Middle East) में महीनों से जारी भारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर आज यानी रविवार को हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। ट्रंप ने साफ किया है कि इस डील के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा।
इस बीच, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पुष्टि की है कि अगले 24 घंटे के भीतर इस शांति समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस डील की बारीकियों को साझा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों पर तीखा हमला बोला। ट्रंप ने लिखा:
“ओबामा के समय की गई ‘JCPOA’ डील ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का एक सीधा और आसान रास्ता थी। अगर वह डील लागू रहती, तो ईरान 6 साल पहले ही परमाणु बम बना चुका होता। लेकिन मेरी यह नई डील पूरी तरह अलग है।”
ट्रंप ने आगे दावा किया कि अब ईरान खुद परमाणु हथियार नहीं चाहता और न ही उसे यह कभी बनाने या खरीदने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ओबामा सरकार की तरह इस बार ईरान को कैश में कोई अरबों डॉलर नहीं दिए जा रहे हैं, यानी इस डील में कोई वित्तीय लेन-देन शामिल नहीं है।
इस समझौते का सबसे चौंकाने वाला और नया एंगल अमेरिकी राष्ट्रपति का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के परमाणु कचरे (Nuclear Dust) को नष्ट करने की बात कही है। ट्रंप के मुताबिक, जैसे ही स्थितियां पूरी तरह सामान्य और शांत होंगी, अमेरिकी सेना एक बड़ा ऑपरेशन चलाएगी।
अमेरिका अपने सबसे आधुनिक B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स (B-2 Bombers) और अनुभवी पायलटों की मदद से ईरान के भीतर दाखिल होगा। वहां ग्रेनाइट के मजबूत पहाड़ों के नीचे गहराई में दबे परमाणु कचरे और सामग्रियों को बाहर निकाला जाएगा और अमेरिकी निगरानी में उसे निष्क्रिय कर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि वे ईरान और मिडिल ईस्ट के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, लेकिन अगर चीजें तय योजना के मुताबिक नहीं हुईं, तो अमेरिका के पास ‘आखिरी सैन्य विकल्प’ भी खुला है।
इस महा-समझौते के पीछे बैकचैनल डिप्लोमेसी (पर्दे के पीछे की कूटनीति) का बड़ा हाथ रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने इस पूरी बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान के लगातार प्रयासों की सराहना की है।
व्हाइट हाउस का रुख: हालांकि, इस तय समय-सीमा को लेकर अभी तक व्हाइट हाउस या ईरानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक औपचारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन शहबाज शरीफ और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति (Geopolitics) में आज एक नया इतिहास लिखने जा रहा है।
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