लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे से बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने मशहूर चुनाव प्रबंधन कंपनी I-PAC (आई-पैक) से दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की हालिया चुनावी हार के बाद सपा के थिंक टैंक ने यह बड़ा फैसला लिया है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर I-PAC के साथ जुड़ने या अलग होने का कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पार्टी के ‘इनसाइडर्स’ का कहना है कि अब अखिलेश यादव चुनावी प्रबंधन की कमान किसी बाहरी एजेंसी के बजाय खुद संभालेंगे।
बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में I-PAC के प्रबंधन के बावजूद ममता बनर्जी और स्टालिन की सत्ता से विदाई ने अखिलेश यादव को सतर्क कर दिया है। हाल के दिनों में I-PAC के दफ्तरों पर पड़ी छापेमारी से पार्टी की छवि पर असर पड़ने का डर था। सपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यूपी की जमीनी राजनीति को पार्टी कार्यकर्ता बाहरी प्रोफेशनल्स से बेहतर समझते हैं।
बताया जा रहा है कि I-PAC और समाजवादी पार्टी के बीच डील लगभग फाइनल हो चुकी थी। जिस दिन लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में I-PAC अपना प्रेजेंटेशन दे रही थी, ठीक उसी समय कोलकाता में उनके दफ्तर पर छापे पड़ रहे थे। ममता बनर्जी खुद आई-पैक के दफ्तर पहुंची थीं, लेकिन इस खबर ने अखिलेश यादव को सोचने पर मजबूर कर दिया था। उस घटना के बाद से ही पार्टी के भीतर संशय के बादल मंडरा रहे थे, जिस पर अब चुनावी नतीजों ने मुहर लगा दी है।
सपा सूत्रों का कहना है कि 2027 के महामुकाबले के लिए अखिलेश यादव अब ‘सेल्फ-मैनेजमेंट’ मोड में हैं। पार्टी अपने पुराने कैडर और स्थानीय रणनीतिकारों पर भरोसा जताएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना किसी प्रोफेशनल एजेंसी के सहयोग के अखिलेश यादव यूपी की चुनौतीपूर्ण पिच पर बीजेपी का मुकाबला कैसे करते हैं।
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