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माघ मेला विवाद पर अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से की बातचीत, देखें-बातचीत का पूरा वीडियो वायरल

लखनऊ। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम नोज पर जाने से रोके जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह मामला अब सियासी रंग भी लेता नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं।

इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल लिया और पूरे मामले पर चर्चा की। दोनों के बीच हुई यह बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

अखिलेश यादव ने फोन पर क्या कहा?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का हालचाल जाना। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनके साथ जो व्यवहार किया गया, वह नहीं होना चाहिए था। अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें शामिल लोग बेहद गलत मानसिकता वाले हैं।

बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने वाराणसी का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मंदिरों को तोड़े जाने के बावजूद प्रशासन इससे इनकार कर रहा है। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि अब तक करीब 150 मंदिर तोड़े जा चुके हैं और यह सिलसिला अब भी जारी है।

अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भरोसा दिलाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी उनके साथ है और वे जल्द ही उनसे मुलाकात करेंगे।

पूरा मामला क्या है?

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार (18 जनवरी) को दावा किया कि मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान राज्य प्रशासन ने उन्हें संगम नोज की ओर जाने से रोक दिया। उनका आरोप है कि संगम घाट की ओर बढ़ते समय पुलिसकर्मियों ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, हालात ऐसे बन गए कि उन्हें और उनके अनुयायियों को पवित्र स्नान किए बिना ही अपने अखाड़े में वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पालकी को रास्ते में रोक दिया गया, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई।

वायरल वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते नजर आ रहे हैं कि, “हम अपनी लड़ाई चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह लड़ रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जन्म से ही हर हिंदू बच्चे का गंगा में स्नान करना उसका जन्मसिद्ध अधिकार होता है, लेकिन उन्हें संगम स्नान से वंचित कर दिया गया। स्वामी ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर दिया है।

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