लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य की सियासी राह मुश्किल होती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके INDIA गठबंधन में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। उन्होंने एक नवंबर को दिल्ली में होने वाले INDIA गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल होने की बात भी कही थी। लेकिन अब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे। वहीं, कांग्रेस ने भी उनके पुराने बयानों और राजनीतिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यूपी की राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे स्वामी प्रसाद मौर्य का अगला कदम क्या होगा? जिस गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद के साथ उन्होंने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी, वहां से फिलहाल उन्हें सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी को INDIA गठबंधन में शामिल किया जा सकता है। इस मुलाकात को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद जताई थी।
लेकिन समाजवादी पार्टी के रुख ने इन अटकलों को झटका दे दिया। अखिलेश यादव के स्पष्ट बयान के बाद कांग्रेस की ओर से भी स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर दूरी बनाने के संकेत मिले हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि गठबंधन को लेकर जब भी बातचीत होगी, तब स्वामी प्रसाद मौर्य के राजनीतिक इतिहास पर विचार किया जाएगा। उन्होंने खास तौर पर देवी-देवताओं को लेकर दिए गए उनके पुराने बयानों का जिक्र किया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उनसे जब INDIA गठबंधन में स्वामी प्रसाद की संभावित एंट्री को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार कर दिया।
अखिलेश यादव ने कहा, “स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे गठबंधन में शामिल नहीं हैं। इग्नोर करो, अवॉइड करो। साइलेंस इज गोल्ड। वो हमारी सीटों की गिनती में शामिल नहीं हो सकते।”
इस बयान से साफ हो गया कि फिलहाल समाजवादी पार्टी स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। अखिलेश के इस रुख के बाद कांग्रेस की भूमिका भी अहम हो गई है, लेकिन पार्टी की ओर से आए बयान ने स्वामी प्रसाद की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि गठबंधन में किसी को शामिल करने से पहले उसके राजनीतिक इतिहास को देखा जाएगा। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से देवी-देवताओं को लेकर पहले दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया।
स्वामी प्रसाद मौर्य के कुछ पुराने बयान पहले भी राजनीतिक विवाद का कारण बन चुके हैं। अब कांग्रेस की ओर से उन बयानों का मूल्यांकन करने की बात कही गई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि गठबंधन में उनकी संभावित एंट्री को केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर तय नहीं किया जाएगा।
समाजवादी पार्टी की ओर से स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर एक और वजह बताई गई है। पार्टी का कहना है कि जब स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में शामिल हुए थे, तब उन्हें विधान परिषद में सदस्य बनाया गया और उन्हें राजनीतिक जिम्मेदारी भी दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने अचानक एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था।
सपा का आरोप है कि उनके इस फैसले से विधान परिषद में पार्टी की एक सीट का नुकसान हुआ। इसी वजह से पार्टी के भीतर उन्हें दोबारा शामिल करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अखिलेश यादव के ताजा बयान से भी यही संकेत मिला है कि सपा इस मुद्दे पर अपना रुख बदलने के लिए तैयार नहीं है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद INDIA गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद जताई थी। लेकिन अखिलेश यादव के इनकार और कांग्रेस प्रवक्ता के बयान ने उनकी राह आसान नहीं रहने दी है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति तेज होने के बीच अब सबकी नजर स्वामी प्रसाद मौर्य के अगले कदम पर रहेगी। क्या वह कांग्रेस के साथ अपनी बातचीत आगे बढ़ाएंगे, किसी दूसरे राजनीतिक विकल्प की तलाश करेंगे या अकेले चुनावी मैदान में उतरेंगे? फिलहाल इन सवालों का जवाब सामने नहीं आया है।
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