झारखंड में छात्रों के आंदोलन के सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद आंदोलनकारी छात्रों में जश्न का माहौल है। इसी बीच वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को वीडियो कॉल कर बधाई दी। दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सामने आया है, जिसमें महतो भावुक नजर आए।
झारखंड में छात्रों का आंदोलन 23वें दिन उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जब हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को मानने का फैसला किया। देवेंद्र नाथ महतो समेत कई छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।
आंदोलन के दौरान महतो 16 दिन तक भूख हड़ताल पर भी रहे। मांगें माने जाने के बाद छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया और जश्न मनाया।
छात्र आंदोलन की सफलता की जानकारी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो को वीडियो कॉल किया। वांगचुक ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी मांगें मान ली गई हैं और वह इस सफलता के लिए उन्हें शुभकामनाएं देना चाहते हैं।
इस पर देवेंद्र महतो ने कहा कि वह वांगचुक से प्रेरित होकर आंदोलन में उतरे थे। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से छात्रों को संघर्ष करने की ताकत मिली।
महतो ने कहा कि भूख हड़ताल के 16वें दिन और आंदोलन के 23वें दिन सरकार ने उनकी मांगें मान लीं। इस दौरान वह भावुक भी दिखाई दिए।
सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो समेत आंदोलन में शामिल सभी छात्रों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को लेकर चिंतित थे और उनकी स्थिति की जानकारी लेने के लिए अपने लोगों को भी लगाया था।
वांगचुक ने कहा कि छात्रों की मेहनत और निष्ठा आखिरकार रंग लाई। उन्होंने झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री को भी छात्रों की मांगें मानने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में जनता और सरकार मिलकर व्यवस्था में जो भी कमियां होंगी, उन्हें दूर करने की कोशिश करेंगे।
वीडियो कॉल के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने सोनम वांगचुक को आंदोलन की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि वांगचुक के समर्थन और आशीर्वाद से छात्रों की आवाज को मजबूती मिली।
महतो ने कहा कि झारखंड के छात्र इस जीत का जश्न मना रहे हैं और यह उनके लिए बड़ी सफलता है।
आंदोलन खत्म होने के बाद भी देवेंद्र महतो ने छात्रों की अगली प्राथमिकता स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि अब ऐसी शिक्षा और भर्ती व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें सरकार यह सुनिश्चित करे कि पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और पैरवी के जरिए नौकरी जैसी शिकायतें दोबारा सामने न आएं।
उन्होंने नियुक्ति संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियुक्ति संस्था को किसी तरह का मुनाफा कमाने वाला उद्योग नहीं बनाया जाना चाहिए।
झारखंड में JSSC और JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्रों में नाराजगी रही है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पुरानी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच समेत कई मांगें उठाई थीं।
अब सरकार के फैसले के बाद छात्रों की नजर इस बात पर है कि उनकी मांगों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है।
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