केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सार्वजनिक होते ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह और जश्न देखा गया।
शनिवार दोपहर जैसे ही इस्तीफे की खबर आई, जंतर-मंतर पर बने मुख्य मंच से आंदोलन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए इस फैसले की घोषणा की। खबर सुनते ही पूरा परिसर नारों, तालियों और खुशी की लहर से गूंज उठा।
संबोधन के दौरान अभिजीत दीपके ने ऐतिहासिक जीत का दावा करते हुए कहा, “हमने कर दिखाया! यह केवल हमारी नहीं, बल्कि देश के उन लाखों छात्रों और युवाओं की जीत है जो अपने अधिकारों और निष्पक्षता के लिए सड़कों पर डटे रहे।”
गौरतलब है कि पिछले कई हफ्तों से शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विभिन्न मांगों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन मार्च निकाल रहे थे।
इस आंदोलन का प्रभाव राजधानी के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक फैल गया था। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे के उठने के बाद सरकार पर नैतिक व राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था, जिसके बाद जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और मिठाइयां बांटीं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अगला क्या कदम उठाती है और शिक्षा मंत्रालय का प्रभार किसे सौंपा जाता है। छात्र नेताओं का मानना है कि यह उनकी प्राथमिक मांगों में से एक थी।
प्रदर्शनकारियों ने साफ़ किया है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में ठोस और पारदर्शी सुधार नहीं होते, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा और वे जल्द ही अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।
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