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TMC-कांग्रेस विलय की अटकलें तेज! ममता के बाद अभिषेक की राहुल से मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल

राजनीति में न तो कोई स्थाई दुश्मन होता है और न ही कोई स्थाई दोस्त; यहाँ सिर्फ ‘अस्तित्व’ स्थाई होता है। पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाने और लोकसभा में 20 सांसदों की अभूतपूर्व बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का पिछले 48 घंटों में दिल्ली के 10 जनपथ (Sonia Gandhi Residence) का चक्कर लगाना देश की सियासत में एक बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है।

लगातार तीन दिनों से गांधी परिवार और तृणमूल नेतृत्व के बीच बंद कमरों में हो रही मुलाकातें महज ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की औपचारिकता नहीं हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह गंभीर सवाल तैरने लगा है: क्या बची-खुची तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अब कांग्रेस में विलय होने जा रहा है?

48 घंटे, 3 मुलाकातें: 10 जनपथ की दहलीज पर टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व

दिल्ली के सबसे रसूखदार राजनीतिक पते पर पिछले तीन दिनों की हलचल को क्रोनोलॉजिकल आर्डर में समझना जरूरी है:

  • सोमवार (8 जून): दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को गले लगाया। बंगाल की हार के बाद दीदी के लिए यह बड़ा मोरल सपोर्ट था।
  • मंगलवार (9 जून): ममता बनर्जी अचानक 5 साल बाद सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। ठीक इसी वक्त कोलकाता में ममता के घर पर सीआईडी (CID) की टीम जांच के लिए दाखिल हो रही थी।
  • बुधवार (10 जून): कूटनीति के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी 10 जनपथ पहुंचे। उन्होंने सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ एक बेहद लंबी और रणनीतिक बैठक की।

क्यों मजबूरी बना विलय? 3 सबसे बड़े राजनीतिक कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि साल 1998 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाने वाली ममता बनर्जी आज अपने जीवन के सबसे कठिन चक्रव्यूह में हैं। पूर्ण संगठनात्मक विलय भले ही तुरंत न हो, लेकिन संसदीय दल का कांग्रेस में समाहित होना तय माना जा रहा है, जिसकी 3 मुख्य वजहें हैं:

1. 20 बागी सांसदों के खिलाफ ‘कानूनी ढाल’

लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग गुट बनाने की अर्जी स्पीकर को दे चुके हैं। इस स्थिति में, यदि टीएमसी संसदीय दल कांग्रेस के साथ खुद को संबद्ध (Affiliate) या विलय कर लेता है, तो कांग्रेस के बड़े कानूनी रणनीतिकार बागियों के खिलाफ एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल विरोधी कानून) का इस्तेमाल करने में टीएमसी की मदद कर सकते हैं।

2. राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा और सिंबल खोने का डर

बंगाल में सत्ता जाने और सांसदों के इस बड़े बिखराव के बाद चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीनने और ‘जोड़ा घास फूल’ सिंबल को फ्रीज करने का कानूनी खतरा मंडरा रहा है। कांग्रेस के बड़े ‘अम्ब्रेला प्रोटेक्शन’ (छतरी संरक्षण) में आने से बचे हुए सांसदों (9 लोकसभा और 12 राज्यसभा) का राजनीतिक वजूद सुरक्षित हो जाएगा।

3. जांच एजेंसियों का शिकंजा और अभिषेक का भविष्य

बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई भाजपा सरकार ने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर प्रशासनिक और कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अभिषेक बनर्जी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। राहुल गांधी के साथ नजदीकी उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक सुरक्षित और मजबूत मंच प्रदान कर सकती है।

संसद में टीएमसी और संभावित कांग्रेस गठबंधन का गणित (2026)

सदन (House)टीएमसी के कुल सदस्यबागी सांसद (Rebels)वफादार (ममता गुट)कांग्रेस से जुड़ाव के बाद स्थिति
लोकसभा282008कांग्रेस खेमे की संसदीय ताकत बढ़ेगी
राज्यसभा02 इस्तीफेशेष सदस्य

“नाक रगड़ रहे हैं दीदी और भतीजे”-मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का तंज

टीएमसी के इस दिल्ली दौरे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा:

“बंगाल की जनता ने तृणमूल को पूरी तरह से उखाड़ फेंका है। अब अपनी डूबती नैया को बचाने के लिए दीदी और भतीजे दोनों दिल्ली में कांग्रेस के पैरों में गिर गए हैं। जिस कांग्रेस को गाली देकर ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति चमकाई थी, आज उसी की चौखट पर नाक रगड़ रही हैं। लेकिन बंगाल की जनता करदाताओं के पैसे की लूट का हिसाब लेकर रहेगी, चाहे ये कांग्रेस में मिल जाएं या कहीं और।”

दूसरी तरफ, टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह मुलाकात केवल केंद्र सरकार के राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ रणनीति बनाने और विपक्षी एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए है।

टेकअवे: इतिहास का चक्र पूरा होने की कगार पर

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है। ममता बनर्जी की राजनीति का चक्र जहां से शुरू हुआ था, आज संकट के सबसे गहरे दौर में वे सुरक्षा के लिए वहीं लौटती दिख रही हैं। संसद के भीतर टीएमसी का कांग्रेस के साथ पूरी तरह समाहित हो जाना अब केवल समय की बात लग रहा है। 10 जनपथ के बंद कमरों से निकलने वाली यह सियासी हवा अगले कुछ दिनों में भारतीय संसद के भीतर एक बहुत बड़े संगठनात्मक फेरबदल की गवाह बनेगी।

news desk

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