रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। अमेरिका ने हूती के खिलाफ सीधे सैन्य हमले में शामिल होने का कोई इरादा नहीं जताया है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी मक्का पैक्ट का हवाला देते हुए साफ किया है कि इस समझौते में हूती जैसे किसी संगठन के हमले की स्थिति में सैन्य मदद का प्रावधान नहीं है। ऐसे में सऊदी अरब खुद को रणनीतिक रूप से मुश्किल स्थिति में पाता नजर आ रहा है।
हूती के लगातार ड्रोन हमलों के चलते सऊदी अरब को अपनी एक अहम तेल पाइपलाइन बंद करनी पड़ी है। अब हूती ने लाल सागर में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण शिपिंग रूट को प्रभावित करने की बात भी कही है। यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा की गई बाधाओं के बीच लाल सागर का रास्ता भी दबाव में आ रहा है।
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने कुछ महीने पहले मक्का पैक्ट किया था। इस समझौते में किसी एक देश पर होने वाले हमले को दोनों के खिलाफ हमला माना गया था। बाद में तुर्की भी इस समझौते में शामिल हुआ। ऐसे में हूती हमलों के बीच पाकिस्तान के रुख ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान ने अब कहा है कि मक्का पैक्ट में हूती जैसे किसी संगठन के हमले की स्थिति में सैन्य सहायता देने की बात शामिल नहीं है। यानी समझौते के बावजूद रियाद को इस मोर्चे पर इस्लामाबाद से तत्काल सैन्य समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं है।
सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटने के मुताबिक, हाल के घटनाक्रमों ने सऊदी किंगडम की बेचैनी बढ़ाई है। उनका कहना है कि अमेरिका सऊदी अरब का भरोसेमंद सहयोगी है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में युद्ध का एक और मोर्चा खोलने के पक्ष में नहीं हैं।
हूती के पीछे ईरान का समर्थन माना जाता है। हूती के अलावा हमास और हिजबुल्ला को भी ईरान समर्थित संगठन माना जाता है। जानकारों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी स्थिति कमजोर होने के बाद ईरान अब हूती के जरिए सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को भी निशाना बनाया था। अब हूती हमलों ने रियाद के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लंबे समय से सऊदी अरब को आधुनिक अर्थव्यवस्था और वैश्विक कारोबारी केंद्र के तौर पर विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने देश की सैन्य तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद मध्य पूर्व का सुरक्षा समीकरण तेजी से बदला। इसके बाद इजरायल की ओर से गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई हुई और संघर्ष का दायरा बढ़ता चला गया। इसका असर ईरान और इजरायल के बीच टकराव तक पहुंचा और अब इसकी आंच सऊदी अरब तक भी महसूस की जा रही है।
रियाद के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ अमेरिका क्षेत्रीय युद्ध को और विस्तार देने से बचना चाहता है, वहीं पाकिस्तान ने भी मक्का पैक्ट की सीमाओं का हवाला देकर सैन्य मदद की संभावना से दूरी बना ली है। ऐसे में हूती के बढ़ते दबाव के बीच सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
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