भारत में एसिडिटी आज एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। मसालेदार खाना, अनियमित जीवनशैली, देर रात तक जागना और बढ़ता तनाव—इन सबके कारण लोगों को अक्सर पेट में जलन, गैस या खट्टी डकार की शिकायत होने लगती है। ऐसे में ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने की बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं। खासकर Pantoprazole, Omeprazole या Ranitidine जैसी दवाएं बहुत आम हो गई हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल अब एक “मूक स्वास्थ्य संकट” बनता जा रहा है। भारत में एसिड से जुड़ी बीमारियां जैसे Gastroesophageal Reflux Disease और Dyspepsia करीब 7.6% लोगों को प्रभावित करती हैं, लेकिन लाखों लोग जांच कराए बिना ही दवाएं लेते रहते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार अगर प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (PPI) और एंटासिड दवाएं महीनों या सालों तक ली जाएं तो इनके गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा किडनी पर पड़ता है। शोध बताते हैं कि इन दवाओं के लंबे इस्तेमाल से Chronic Kidney Disease का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा ये दवाएं पेट में एसिड कम कर देती हैं, जिससे शरीर में कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और Osteoporosis का खतरा बढ़ जाता है।
एक और समस्या शरीर में विटामिन की कमी है। खासकर Vitamin B12 की कमी हो सकती है, जिससे थकान, कमजोरी और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
पेट का एसिड बैक्टीरिया को मारने में भी मदद करता है। लेकिन जब एसिड कम हो जाता है तो आंतों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, जैसे Clostridium difficile infection।
भारत में सेल्फ-मेडिकेशन यानी बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने की आदत काफी आम है। एंटासिड और एसिडिटी की गोलियां आसानी से मिल जाती हैं, इसलिए लोग इन्हें लंबे समय तक लेते रहते हैं। समस्या यह भी है कि जब दवा बंद की जाती है तो एसिडिटी फिर से बढ़ जाती है, जिसे रिबाउंड एसिडिटी कहा जाता है। इससे लोग दोबारा दवा लेना शुरू कर देते हैं और एक चक्र बन जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि एसिडिटी से बचने के लिए सबसे पहले जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। हल्का भोजन करें, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना कम करें, रात का खाना जल्दी खाएं और खाने के तुरंत बाद न लेटें। वजन नियंत्रित रखना और तनाव कम करना भी जरूरी है।
अगर एसिडिटी दो हफ्ते से ज्यादा बनी रहती है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर ही दवाएं लें और वह भी सीमित समय के लिए। विशेषज्ञों का साफ कहना है—एसिडिटी की गोली छोटी जरूर है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल बड़े स्वास्थ्य खतरे पैदा कर सकता है।
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