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ABB India Limited के नतीजों के बाद शेयर फिसला, ऑर्डर 5 साल के हाई पर, फिर भी क्यों टूटा शेयर?

ABB India Limited ने जैसे ही CY25 के चौथे क्वार्टर के नतीजे घोषित किए, बाजार का मूड अचानक बदल गया। शुरुआत में शेयर करीब 4% चढ़ा, लेकिन थोड़ी ही देर में तस्वीर पलट गई और मुनाफावसूली शुरू हो गई। नतीजा—शेयर दबाव में आ गया।

आखिर हुआ क्या?

देखने में रेवेन्यू बढ़ा है और ऑर्डर इनफ्लो तो 5 साल के हाई पर पहुंच गया, लेकिन निवेशकों की नजर सबसे पहले मुनाफे पर जाती है।

  • नेट प्रॉफिट 18% गिरकर ₹432.85 करोड़ रह गया (पिछले साल ₹528.41 करोड़ था)।
  • रेवेन्यू 5.7% बढ़कर ₹3,557 करोड़ पहुंचा।
  • EBITDA ₹546 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹657 करोड़ था।
  • मार्जिन करीब 15.35% रहा।

कंपनी ने बताया कि फॉरेक्स और कमोडिटी से मिले फायदे ने मार्जिन को संभाला। फॉरेक्स और लेबर कोड एडजस्टमेंट के बाद मार्जिन 17% के आसपास बताया गया, जो पिछले क्वार्टर से बेहतर है।

फॉरेक्स ने बचाया गेम

इस बार कंपनी को ₹62 करोड़ का फॉरेक्स गेन हुआ, जबकि पिछले क्वार्टर में ₹40 करोड़ का नुकसान था। यानी घाटे से सीधे मुनाफे में शिफ्ट।

लेकिन यहीं बाजार थोड़ा सतर्क हो गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मार्जिन में सुधार ऑपरेशन से ज्यादा फॉरेक्स या कमोडिटी जैसे बाहरी फैक्टर्स से आ रहा है, तो यह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता। शायद इसी वजह से ट्रेडर्स ने जल्दी मुनाफा बुक कर लिया।

पॉजिटिव क्या रहा?

  • ऑर्डर इनफ्लो 52% उछलकर ₹4,096 करोड़—पांच साल का हाई।
  • पूरे साल के ऑर्डर ₹14,115 करोड़ (8% ग्रोथ)।
  • सालाना रेवेन्यू ₹13,203 करोड़।
  • ₹29.59 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित।

यह साफ संकेत है कि कंपनी के पास काम की कमी नहीं है और ऑर्डर बैकलॉग मजबूत है।

दबाव कहां से आया?

हाई मटेरियल कॉस्ट, आयात से जुड़े QCO इश्यू, लेबर कोड का असर और मार्जिन पर दबाव—इन सबने मुनाफे को प्रभावित किया। ब्रोकरेज हाउस ने तो 19% तक डाउनसाइड की आशंका भी जता दी, क्योंकि रिजल्ट उम्मीद से थोड़ा नीचे रहे।

कंपनी के कंट्री हेड संजीव शर्मा ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत हैं।

बाजार का मैसेज क्या है?

यह पूरा घटनाक्रम एक बात साफ करता है—अब बाजार सिर्फ नंबर्स नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि मुनाफा कहां से आ रहा है।

ग्लोबल स्तर पर ABB की पैरेंट कंपनी ने अच्छे नतीजे दिखाए हैं, लेकिन फिलहाल निवेशकों की नजर भारतीय यूनिट की सस्टेनेबल ग्रोथ पर टिकी हुई है।

कुल मिलाकर, कहानी मिक्स्ड है—ऑर्डर मजबूत, लेकिन प्रॉफिट पर दबाव। इसलिए निवेशकों का मूड भी थोड़ा सावधान नजर आ रहा है।

news desk

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