नई दिल्ली: युद्ध के मैदान में इंटरनेट कनेक्शन कितना अहम हो सकता है, इसका अंदाजा यूक्रेन में सामने आई एक घटना से लगाया जा सकता है। एलन मस्क की कंपनी की सैन्य इस्तेमाल वाली सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारशील्ड की गति अचानक कम किए जाने से यूक्रेनी सेना का एक अहम ड्रोन मिशन प्रभावित हुआ। इस घटना ने स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट सेवाओं पर सैन्य निर्भरता और उनके बाहरी नियंत्रण को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सवाल यह है कि अगर युद्ध के बीच किसी निजी कंपनी या सरकार के फैसले से संचार व्यवस्था प्रभावित हो जाए, तो सेना की रणनीति पर इसका कितना बड़ा असर पड़ सकता है?
एलन मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की क्षमताओं की तारीफ करते रहे हैं, लेकिन यूक्रेन में सामने आई घटना ने इसके दूसरे पहलू पर ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारलिंक के सैन्य संस्करण स्टारशील्ड की इंटरनेट गति बिना किसी पूर्व सूचना के कम कर दी गई। इससे यूक्रेनी सेना का एक महत्वपूर्ण ड्रोन अभियान प्रभावित हुआ। बताया गया कि इंटरनेट की गति घटने के कारण करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले ड्रोन की गति भी प्रभावित होने लगी। इस घटनाक्रम का असर रूसी सैन्य पक्ष पर भी पड़ा।
एलन मस्क की कंपनी की सेवाओं को नियंत्रित करने और कुछ परिस्थितियों में बंद किए जाने को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि ड्रोन पर स्टारलिंक टर्मिनल लगाकर संचार में बाधा डालने वाली तकनीकों से बचने और लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में मदद मिली है। सेवा के नियंत्रण, संभावित डेटा चोरी और जासूसी को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ऐसे आरोपों को स्थापित तथ्य मानने से पहले उनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट में चक्कर लगाने वाले हजारों सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराता है। इन उपग्रहों से भेजे जाने वाले संकेत संचार कायम रखने में मदद करते हैं। उपग्रह लगातार गति में रहते हैं और उनसे आने वाले संकेत सीमित क्षेत्र में केंद्रित हो सकते हैं। इस तकनीक की मदद से ड्रोन ऑपरेटर लंबी दूरी तक ड्रोन को संचालित करने के लिए संचार संपर्क बनाए रख सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक ने यूक्रेन को ऐसी संचार सुविधा दी है, जिस पर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का असर सीमित करने में मदद मिलती है। इस सेवा के हजारों टर्मिनल अग्रिम मोर्चे पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पोलैंड की ओर से यूक्रेन को करीब 29,000 टर्मिनल दिए जाने की जानकारी है, जबकि यूक्रेन में इस्तेमाल हो रहे कुल टर्मिनलों की संख्या एक लाख से अधिक बताई गई है।
इतनी बड़ी निर्भरता के बीच चिंता यह है कि यदि किसी निजी कंपनी या अमेरिकी सरकार के पास इन टर्मिनलों की सेवा नियंत्रित करने की क्षमता है, तो युद्ध के दौरान संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आधुनिक युद्ध में सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान, ड्रोन का संचालन और सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क बेहद अहम होते हैं। ऐसे में संचार सेवा पर बाहरी नियंत्रण किसी सैन्य अभियान के लिए जोखिम बन सकता है।
यह मामला दूसरे देशों के लिए भी एक सबक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सैन्य और रणनीतिक जरूरतों के लिए व्यावसायिक सैटेलाइट सेवाओं पर निर्भरता बढ़ाने के साथ उनके नियंत्रण, जवाबदेही और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी स्पष्ट नियम जरूरी हैं। यूरोपीय संघ स्टारलिंक के विकल्प के तौर पर आईआरआईएस जैसे अपने और बहुपक्षीय सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने पर जोर दे रहा है। यूक्रेन की घटना के बाद ऐसे विकल्पों की अहमियत पर बहस और तेज हो सकती है।
स्टारशील्ड की इंटरनेट गति कम किए जाने को लेकर एलन मस्क ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सेवा अमेरिकी सरकार और सेना के नियंत्रण में है। इसकी गति बढ़ाने या घटाने का फैसला अमेरिकी सेना और अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार क्षेत्र में आता है। मस्क के मुताबिक, इस मामले का स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवा से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टारलिंक का इस्तेमाल आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा सकता।
मस्क के इस बयान से सेवा के नियंत्रण को लेकर बहस और अहम हो गई है। यदि किसी संचार नेटवर्क की उपलब्धता और क्षमता का फैसला उसके संचालक या संबंधित सरकार के हाथ में हो, तो उस पर निर्भर सेना को संकट के समय वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट में भी स्टारलिंक से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों पर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट में सरकार को सुरक्षा मंजूरी देने से पहले ऐसे पहलुओं पर विचार करने की सलाह दी गई है। इसमें आशंका जताई गई है कि कुछ अवैध टर्मिनल सरकारी आदेश के बावजूद सक्रिय रह सकते हैं। बाहरी नियंत्रण की स्थिति में जरूरत के समय सेवा बंद होने का जोखिम भी बना रह सकता है। इसके अलावा, डेटा का इस्तेमाल भारतीय हितों के खिलाफ किए जाने की आशंका भी चिंता का विषय बताई गई है।
भारत में स्टारलिंक की सेवा शुरू होने में हो रही देरी को लेकर एलन मस्क ने हाल में सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के 195 देशों में स्टारलिंक की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन भारत के ऊपर इसकी सैटेलाइट बीम बंद है।
यूक्रेन की घटना ने यह सवाल सामने रखा है कि आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी संचार व्यवस्था को किसी एक निजी कंपनी या बाहरी सरकार के नियंत्रण पर कितना निर्भर होना चाहिए। ऐसी सेवाएं मुश्किल हालात में संचार बनाए रखने में मददगार हो सकती हैं, लेकिन इनके साथ मजबूत नियमन, स्वतंत्र नियंत्रण और भरोसेमंद वैकल्पिक नेटवर्क की जरूरत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
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