मौजूदा दौर में लोग पार्टी करने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं. नए साल का जश्न हो, दिवाली हो या कोई और अवसर-दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर सेलिब्रेशन करना आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है.लेकिन गोवा में इस बार एक ऐसा कार्यक्रम प्रस्तावित था, जिसे लेकर उत्साह के साथ-साथ विवाद भी खूब देखने को मिला.
दरअसल, गोवा में ‘टेल्स ऑफ कामसूत्र एंड क्रिसमस सेलिब्रेशन’ नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी.कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर जोरदार प्रचार-प्रसार किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई. लोगों का कहना था कि इस तरह का आयोजन उनके सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है.इसे रजनीश फाउंडेशन के नाम से प्रचारित किया जा रहा था, जबकि इसके संचालक के रूप में ओशो लुधियाना मेडिटेशन सोसाइटी से जुड़े स्वामी ध्यान सुमित का नाम सामने आया था. कार्यक्रम का उद्देश्य कामसूत्र से संबंधित कथाओं, ध्यान सत्रों (Meditation Sessions) और वेलनेस से जुड़ी गतिविधियों को प्रस्तुत करना बताया गया था।
स्थानीय विरोध बढ़ने के बाद गोवा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिसंबर में होने वाले आयोजन पर रोक लगा दी.पुलिस ने आयोजकों को कार्यक्रम निरस्त करने और सभी ऑनलाइन विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया.
गोवा पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा “हमने मामले का तत्काल संज्ञान लिया है. आयोजकों को कार्यक्रम को आगे न बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, सोशल मीडिया पर डाले गए सभी विज्ञापनों को तुरंत हटाने के लिए कहा गया है. राज्य के सभी पुलिस थानों को ऐसे आगामी आयोजनों पर सतर्क निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं.”
कार्यक्रम के विज्ञापन की कड़ी निंदा
भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन के अध्यक्ष और गोवा के आर्चबिशप फिलिप नेरी कार्डिनल फेराओ ने इस कार्यक्रम के विज्ञापन की तीखी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह विज्ञापन ईसा मसीह के पवित्र जन्मोत्सव को अश्लील और असंबंधित विषयों से जोड़ने वाला गैर-जिम्मेदाराना प्रयास है, जो लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाता है.
आर्चबिशप ने आयोजकों से तुरंत विज्ञापन वापस लेने और क्रिसमस के आध्यात्मिक महत्व का सम्मान करने की अपील की. साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से मामले की गंभीरता से जांच करने को भी कहा.
उन्होंने सभी कैथोलिकों और सद्भावनापूर्ण लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जो धार्मिक मूल्यों का अपमान करती हो या समुदाय में असहजता फैलाती हो.
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली और इस फैसले की खुलकर सराहना की.
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