लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला शिक्षिका ने राष्ट्रपति से अपने परिवार सहित इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। शिक्षिका का आरोप है कि वह लंबे समय से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं, जिसके चलते उन्हें यह कठोर कदम उठाने की नौबत आई।
बागपत में 32 वर्षीय एक सरकारी शिक्षिका ने अपने खून से पत्र लिखकर राष्ट्रपति से परिवार सहित इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। शिक्षिका का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति उनके साथ लगातार छेड़खानी करते रहे कभी हाथ पकड़ना, तो कभी अकेले में बुलाने जैसी हरकतें की गईं।
महिला शिक्षिका का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में नजदीकी थाने में कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने से आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया। फिलहाल शिक्षिका बागपत कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठी हैं। उधर, जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह मामला खेड़ा स्थित हजारीलाल मेमोरियल इंटर कॉलेज से जुड़ा बताया जा रहा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को खून से लिखा ज्ञापन सौंपा और राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की। इस घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले की व्यापक चर्चा हो रही है।
बताया जा रहा है कि बुलंदशहर की रहने वाली यह महिला वर्ष 2022 से बागपत स्थित इंटर कॉलेज में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल और वर्तमान प्रबंधक राजेंद्र सिंह भाटी द्वारा उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
सोमवार को शिक्षिका अपने परिवार और समाज के लोगों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अपना खून एकत्र कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन लिखा। शिक्षिका ने पत्र में कहा कि वह अब इस कथित प्रताड़ना को सहने की स्थिति में नहीं हैं।
शिक्षिका ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि इसी प्रशासनिक उदासीनता ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
जांच का मिला आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार संगठनों ने भी हस्तक्षेप किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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