बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी में तीखी बढ़ोतरी के बीच, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार के आरोप पर तीखा पलटवार किया. मोदी ने कहा था कि आरजेडी ने कांग्रेस की कनपटी पर ‘कट्टा’ सटाकर उन्हें महागठबंधन का सीएम चेहरा घोषित करवाया।
तेजस्वी का जवाब – “जिसकी जैसी सोच, वैसी भावना”
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने मोदी के बयान को “जिसकी जैसी सोच, वैसी भावना” कहकर खारिज किया. उन्होंने कहा, “वो वैसा ही करते हैं और वैसा ही बोलते हैं.” इसके बाद तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “शायद उन्होंने भी कट्टा सटाकर एनडीए गठबंधन में लोगों को शामिल करवाया होगा.” तेजस्वी ने प्रधानमंत्री की भाषा पर हमला बोलते हुए कहा, “हमने कभी किसी प्रधानमंत्री को ऐसी भाषा बोलते नहीं देखा. देखिए उनकी भाषा – गुजरात जाएंगे तो फैक्ट्री, आईटी और डेटा सेंटर की बात करेंगे. बिहार आएंगे तो कट्टे की बात करेंगे.”
मोदी के “कट्टा” वाले बयान से गरमाई सियासत
मोदी ने रविवार को आरा और नवादा की रैलियों में इंडिया गठबंधन के भीतर कथित दादागिरी का जिक्र करते हुए कहा था कि कांग्रेस शुरू में आरजेडी नेता को सीएम चेहरा बनाने को तैयार नहीं थी, लेकिन आरजेडी ने “गुंडागर्दी” कर “कनपटी पर कट्टा” सटाकर यह फैसला मनवाया. उन्होंने कहा, “कांग्रेस कभी आरजेडी नेता को सीएम चेहरा बनाना नहीं चाहती थी. आरजेडी ने कांग्रेस की कनपटी पर बंदूक सटाकर सीएम पद की कुर्सी छीन ली.”
नीतीश की गैरमौजूदगी बनी विपक्ष का हथियार
यह बयानबाजी बिहार में नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हो रही है. महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और अन्य सहयोगी) ने पिछले महीने तेजस्वी को सर्वसम्मति से सीएम उम्मीदवार घोषित किया था, जिसकी सत्तारूढ़ एनडीए (बीजेपी और जदयू) ने कड़ी आलोचना की है. मोदी के बिहार दौरे में रविवार को पटना में भव्य रोड शो भी शामिल था, जहां उन्होंने लगातार विपक्ष की आंतरिक कलह और तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर निशाना साधा.
हालांकि, इसी रोड शो के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नदारद रहे, जो विपक्ष के लिए लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. इससे पहले भी अमित शाह के चुनाव प्रचार कार्यक्रमों में नीतीश कुमार नजर नहीं आए थे, जिसे महागठबंधन लगातार एनडीए के आंतरिक मतभेद के रूप में उछाल रहा है. तेजस्वी ने भी सोमवार को नीतीश की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “इसमें कौन सी चौंकने वाली बात है? सब जानते हैं कि बीजेपी नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी।” एनडीए के घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) जारी करने के दौरान नीतीश कुमार ने एक शब्द भी नहीं बोला था, जिसे कांग्रेस ने “बिहार और बिहारियों का अपमान” बताया था. विपक्षी नेता अशोक गहलोत ने इसे “26 सेकंड का प्रेस कॉन्फ्रेंस” करार देते हुए कहा कि एनडीए नेता सवालों से डरते हैं.
चुनावी रणनीति या सियासी तीर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ही प्रधानमंत्री मोदी ने अब विपक्ष के आंतरिक मतभेदों को उजागर करने की कोशिश की है, ताकि एनडीए की एकजुटता पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जा सके. 36 वर्षीय तेजस्वी, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र, खुद को युवा चेहरा बताते हुए नौकरियों और विकास का वादा कर रहे हैं। वे मोदी के “जंगलराज” वाले आरोपों का जवाब देते हैं। ‘कट्टा’ का मुहावरा, जो बिहार में जबरदस्ती का प्रतीक है, अब विवाद का केंद्र बन गया है. तेजस्वी ने इसे उल्टा एनडीए पर फेंकते हुए कहा कि यह मोदी की अपनी गठबंधन रणनीति को उजागर करता है.
राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति मान रहे हैं – मोदी विपक्ष में दरार दिखाना चाहते हैं, जबकि तेजस्वी बीजेपी को बिहार की जमीन से कटा हुआ और अभिजात्य दिखाना चाहते हैं. इस सप्ताह और रैलियां निर्धारित हैं, ऐसे में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है