नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर फिर से प्रतिबंध लगाने की मांग के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. उनके इस बयान पर योग गुरु बाबा रामदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मीडिया से बातचीत में रामदेव ने कहा, “आरएसएस कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, उसका राजनीतिक विंग बीजेपी है. अगर लड़ाई करनी है तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह से करो, आरएसएस पर अभद्र टिप्पणी करना गलत है.” उन्होंने कहा कि वे दशकों से संघ के काम को करीब से देख रहे हैं और इसमें तपस्वी, राष्ट्रसेवी लोग हैं. उन्होंने जोड़ा “आरएसएस का विरोध करने वालों के विचार भारत और भारतीयता से मेल नहीं खाते.”
खड़गे के बयान से गरमाई सियासत
दरअसल, खड़गे ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर कहा था, “मेरा व्यक्तिगत विचार है कि आरएसएस पर बैन लगना चाहिए. अगर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह सरदार पटेल की सोच का सम्मान करते हैं, तो यह कदम उठाया जाना चाहिए.” उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर देश की मौजूदा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया. यह विवाद उस वक्त और गहराया जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग दोहराई. वहीं, खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया कि सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका जाए.
इतिहास में भी आरएसएस पर 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे 1949 में सशर्त हटा लिया गया था, जब संगठन ने पारदर्शिता और अहिंसा का संकल्प लिया था.