अब गांव-गांव में नेट की रफ्तार आसमान से उतरेगी. एलन मस्क की सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस Starlink जल्द ही भारत में शुरू होने जा रही है. माना जा रहा है कि स्टारलिंक देश के डिजिटल नेटवर्क में एक नई क्रांति लाएगी. खासकर उन इलाकों में, जहां अब तक पारंपरिक इंटरनेट सेवाएं पहुंचने का नाम भी नहीं ले पाईं.
गुरूवार से स्टारलिंक का डेमो शुरू होगा जो 31 अक्तूबर को भी जारी रहेगा. इस दौरान कंपनी अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस की सिक्योरिटी का डेमो लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों को दिखाएगी. डेमो में सबकुछ ठीक रहा तो कंपनी को भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस शुरू करने के लिए जरूरी क्लियरेंस मिलेंगे. सूत्रों की माने तो इसी हफ्ते ऑन साइट जांच शुरू हो सकती है. शुरूआती चरण में स्टारलिंक के फोकस पर शहरी क्षेत्र हैं. बाद में ग्रामीण इलाकों तक इसका विस्तार किया जाएगा.
क्या है Starlink?
Starlink, एलन मस्क की कंपनी SpaceX की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लक्ष्य है धरती के हर कोने में तेज़ और स्थायी इंटरनेट पहुंचाना. इसके लिए कंपनी ने लो-अर्थ ऑर्बिट में हजारों छोटे उपग्रह भेजे हैं, जो धरती के चारों ओर लगातार घूमते रहते हैं.
इन सैटेलाइट्स से सिग्नल सीधे यूज़र के घर पर लगे डिश एंटेना तक पहुंचता है, जिससे इंटरनेट कनेक्शन मिलता है. वो भी बिना किसी फाइबर, केबल या टॉवर के. यानी अब इंटरनेट पाने के लिए टॉवर की नहीं, बस ‘आसमान की’ जरूरत है.
सुरक्षा को लेकर जताया जा रहा है अंदेशा?
भारत जैसे विशाल और विविध भूगोल वाले देश में, जहां पहाड़ी, जंगलों से घिरे या सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट लगाना हमेशा से मुश्किल रहा है, क्योंकि पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना महंगा और जटिल होता है. लेकिन Starlink के ज़रिए यह बाधा लगभग खत्म हो जाएगी.
हालांकि स्टारलिंक को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को लेकर. वहीं भारत की दूरसंचार कंपनियां जैसे जियो, एयरटेल के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी. हालांकि इस प्रतिस्पर्धा से आम लोगों के सामने सस्ते नेटवर्क का विकल्प भी खुल सकता है.