लखनऊ जिला कारागार में मंगलवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब भूतपूर्व विधायक और सपा नेता गायत्री प्रजापति पर एक कैदी ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया. इस हमले में गायत्री के सिर से खून बहने लगा, जिसके बाद जेल में अफरा-तफरी मच गई और उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया.
कैसे हुआ हमला ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे उन्होंने अस्पताल में सफाई करने वाले कैदी विश्वास को पानी लाने के लिए बुलाया था. देर होने पर गायत्री ने उसे कुछ कह दिया, जिसके बाद विश्वास आग-बबूला हो उठा और उसने पास में रखी लोहे की रॉड से गायत्री के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए. अचानक हुए इस हमले से गायत्री लहूलुहान होकर चीखने लगे. गायत्री पर हमला होते देख अन्य कैदी मौके पर दौड़े और हमलावर को पकड़ लिया.
जेलकर्मियों ने भी तुरंत हस्तक्षेप किया और डॉक्टर को बुलाया. प्राथमिक उपचार के बाद गायत्री की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जेल की एंबुलेंस से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर भेजा गया.
गौरतलब है कि गायत्री प्रजापति लंबे समय से बीमारियों के चलते जेल अस्पताल में भर्ती थे.
घटना की सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक आरके जायसवाल, जेलर और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. वहीं, केजीएमयू पहुंचने के बाद गायत्री की पत्नी और भारी संख्या में समर्थक भी ट्रॉमा सेंटर में जुट गए.
अखिलेश यादव ने की न्यायिक जाँच की मांग
गायत्री प्रजापति पर हुए हमले के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए न्यायिक जाँच की मांग की है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘भूतपूर्व विधायक व उप्र सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति पर जेल में हुए जानलेवा हमले की निष्पक्ष न्यायिक जाँच हो.उप्र में कहीं भी, कोई भी सुरक्षित नहीं है.’
जेल प्रशासन का पक्ष
वहीं जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक आरके जायसवाल ने मीडिया को बताया कि गायत्री और सफाईकर्मी बंदी के बीच कहासुनी हो गई थी. इसी दौरान बंदी ने रॉड से प्रहार कर दिया. हालांकि उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है, चोट मामूली थी . बेहतर ट्रीटमेंट के लिए उन्हें केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया है. वहां इलाज शुरू कर दिया है. डॉक्टरों ने गायत्री की हालत खतरे से बाहर बताई है.
पिछले कुछ समय से यूपी जेल में हुए बड़े हादसे
पिछले कुछ वर्षों में यूपी की जेलों में कई बड़े और चौंकाने वाले हादसे सामने आए हैं. 2018 में मुन्ना बजरंगी की हत्या और 2024 में मुख्तार अंसारी की मौत ने जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए. इसके अलावा, जौनपुर के बक्शा थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी कृष्णा यादव उर्फ ‘पुजारी’ को 11 फरवरी 2021 की रात करीब 8 बजे पुलिस और एसओजी की टीम छिनैती के एक मामले में पूछताछ के लिए घर से उठाकर ले गई थी. आरोप है कि थाने ले जाकर उसे बेरहमी से पीटा गया, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. इसी तरह, कुख्यात अपराधी अक्षय सोलंकी, जो कई हत्याकांडों में शामिल था, जेल के भीतर ही गैंगवार में मारा गया. प्रतिद्वंद्वी गिरोह के बदमाशों ने जेल में हथियार तस्करी कर अंदर पहुँचाए और उस पर 50 से अधिक गोलियां चलाईं. इस घटना में एक अन्य बंदी राजेश शर्मा उर्फ टोण्टा भी घायल हुआ था, जिसकी बाद में 2016 में जेल के बाहर हत्या कर दी गई. इन मामलों में जेल स्टाफ की मिलीभगत और सुरक्षा व्यवस्था की भारी चूक को लेकर कई गंभीर आरोप लगे हैं.