चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में ‘थलापति’ सी. जोसेफ विजय का दबदबा कायम है। मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा के पटल पर अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया है। शक्ति परीक्षण (Floor Test) के दौरान विजय सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में मात्र 22 वोट ही आए। इस फ्लोर टेस्ट ने न केवल विजय की सत्ता पर मुहर लगाई, बल्कि प्रमुख विपक्षी दल AIADMK के दो फाड़ होने की तस्वीर भी साफ कर दी।
AIADMK में ऐतिहासिक बगावत: पलानीस्वामी बनाम वेलुमणि
तमिलनाडु चुनाव के नतीजों ने AIADMK को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था, लेकिन अब पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। विधानसभा में AIADMK के 47 विधायकों में से 25 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मुख्यमंत्री विजय के समर्थन में वोट दिया।
- बागी गुट: सीवी षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने विजय सरकार को समर्थन दिया है।
- पलानीस्वामी की मुश्किलें: महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए बागी विधायकों ने उनके इस्तीफे की मांग की है।
- सदन का नेता कौन?: जहाँ एक गुट EPS को नेता मान रहा है, वहीं दूसरा गुट एस.पी. वेलुमणि को सदन में नेता घोषित करने पर अड़ा है।
विजय की लहर में DMK गठबंधन भी बिखरा
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री विजय का मुख्य निशाना एम.के. स्टालिन और DMK थी। विजय ने न केवल सत्ता हासिल की, बल्कि DMK के पुराने सहयोगियों को भी अपने पाले में कर लिया।
- कांग्रेस और VCK ने DMK का साथ छोड़ मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का फैसला किया है।
- DMK ने इस फ्लोर टेस्ट से वॉकआउट किया, लेकिन उसके गठबंधन का टूटना स्टालिन के लिए भविष्य की राजनीति में बड़ी चुनौती बन गया है।
विधानसभा का नया गणित: एक नज़र में
| विवरण | संख्या / स्थिति |
| बहुमत के लिए आवश्यक | 118 |
| विजय सरकार को मिले वोट | 144 |
| विरोध में पड़े वोट | 22 (EPS गुट) |
| AIADMK की स्थिति | 47 सीटें (25 बागी, 22 वफादार) |
| प्रमुख विपक्षी (DMK) | 59 सीटें (वॉकआउट किया) |
फ्लोर टेस्ट के नतीजों से साफ है कि मुख्यमंत्री विजय ने न केवल सदन में संख्या बल जुटाया है, बल्कि विपक्षी खेमों में सेंधमारी कर अपनी स्थिति को अभेद्य बना लिया है। AIADMK में जारी यह कलह पार्टी को औपचारिक रूप से दो हिस्सों में बांट सकती है, हालांकि दलबदल कानून से बचने के लिए बागियों को अभी और समर्थन की जरूरत होगी।