चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में अचानक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। AIADMK में हुई बड़ी टूट ने एक्टर-से-राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम (TVK) को सीधे फायदा पहुंचाया है।
फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम में सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले AIADMK गुट ने TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने विधानसभा में विजय की स्थिति को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया है।
दरअसल, AIADMK अब दो हिस्सों में बंट चुकी है। एक तरफ ईपीएस गुट के पास 22 विधायक हैं, वहीं सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट के साथ 24 विधायक खड़े हैं। यही 24 विधायक अब विजय की पार्टी के साथ आ गए हैं, जिससे सत्ता का संतुलन तेजी से TVK के पक्ष में झुकता दिख रहा है।
‘किंगमेकर’ बना बागी गुट
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका AIADMK के बागी गुट की बन गई है, जो अब ‘किंगमेकर’ की स्थिति में आ गया है। DMK को समर्थन देने से साफ इनकार कर इस गुट ने सीधे विजय को ताकत दे दी है।
सीवी शनमुगम ने साफ कहा कि DMK के साथ जाना पार्टी की विचारधारा के खिलाफ होता और इससे AIADMK का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता। यही वजह है कि उन्होंने DMK के बजाय TVK को समर्थन देना बेहतर समझा।
फ्लोर टेस्ट से पहले बदल गया पूरा गेम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्लोर टेस्ट से पहले यह समर्थन विजय के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। पहले जहां उन्हें बहुमत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था, अब वही विधायक खुद उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं।
DMK को डबल झटका
इस घटनाक्रम से DMK को दोहरा नुकसान हुआ है—AIADMK का एक बड़ा गुट साथ नहीं आया, TVK की ताकत अचानक बढ़ गई।
तमिलनाडु में अब नजरें फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि विजय की राजनीति कितनी मजबूत हो चुकी है। लेकिन इतना तय है कि इस टूट ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।