नई दिल्ली/लखनऊ। देश में इस समय आईपीएल का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की एक कार्रवाई ने क्रिकेट एसोसिएशनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। एनजीटी ने देश के 6 बड़े क्रिकेट स्टेडियमों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए और वहां होने वाली गतिविधियों को क्यों न रोक दिया जाए?
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
मामला क्रिकेट पिचों और मैदानों के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाले पानी के स्रोत (Source) से जुड़ा है। एनजीटी ने पहले ही निर्देश दिया था कि सभी स्टेडियम अपने यहाँ इस्तेमाल होने वाले पानी की जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (CGWA) को दें।
आरोप: याचिका में दावा किया गया है कि स्टेडियम मैनेजमेंट मैदानों के लिए ‘सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट’ (STP) के रिसाइकिल पानी के बजाय कीमती भूजल (Groundwater) या ताजे पानी की बर्बादी कर रहे हैं।
वॉटर हार्वेस्टिंग पर सवाल: एनजीटी ने यह भी पूछा है कि इन स्टेडियमों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) की पुख्ता व्यवस्था क्यों नहीं की गई है?
इन 6 स्टेडियमों पर गिरी गाज
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने पाया कि बार-बार निर्देश के बावजूद इन स्टेडियमों ने कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया। जिन स्टेडियमों को नोटिस मिला है, उनमें शामिल हैं:
- भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम (लखनऊ)
- अरुण जेटली स्टेडियम (दिल्ली)
- सवाई मानसिंह स्टेडियम (जयपुर)
- डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम (नवी मुंबई)
- शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम (रायपुर)
- बाराबती स्टेडियम (कटक)
इकाना के लिए बढ़ी मुश्किल, 2 जुलाई को अगली सुनवाई
लखनऊ के इकाना स्टेडियम के लिए यह खबर इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यहाँ कल (रविवार) को LSG और KKR का अहम मुकाबला होना है। एनजीटी ने साफ कर दिया है कि अगर ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो भविष्य में होने वाली खेल गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
हैदराबाद के स्टेडियम ने जवाब देने के लिए 3 हफ्ते का समय मांगा है, लेकिन बाकी 6 स्टेडियमों की खामोशी पर एनजीटी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को होगी।