नई दिल्ली: नई दिल्ली: Delhi High Court में Arvind Kejriwal से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जस्टिस Tejas Karia के इस केस की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर यह मामला अब किस बेंच में जाएगा? जज के इस फैसले ने पूरे मामले में सस्पेंस और बढ़ा दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कारिया ने खुद ही साफ किया कि वह इस याचिका की सुनवाई नहीं करेंगे। उन्होंने इसके पीछे Meta Platforms से जुड़ी वजह का हवाला दिया, जिससे संभावित हितों के टकराव (conflict of interest) की स्थिति बन सकती थी। ऐसे में न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।
किस बेंच को मिलेगा केस?
अब यह याचिका Delhi High Court के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के पास जाएगी, जो इसे किसी दूसरी बेंच को सौंपेंगे। आमतौर पर ऐसे मामलों में नई बेंच का गठन या मौजूदा बेंच को ट्रांसफर किया जाता है। लेकिन जब मामला हाई-प्रोफाइल हो, तो यह तय करना और भी अहम हो जाता है कि सुनवाई कौन करेगा।
क्यों बढ़ा सस्पेंस?
यह केस पहले से ही राजनीतिक और कानूनी रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में जज के हटने के बाद अब हर किसी की नजर इस पर है कि नई बेंच कौन सी होगी और सुनवाई कब शुरू होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बेंच के चयन से केस की दिशा और गति पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है रीक्यूज़ल का मतलब?
‘Recusal’ यानी जज का खुद को केस से अलग करना—यह तब किया जाता है जब जज को लगता है कि किसी भी कारण से उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकता है। यह न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, जिससे कोर्ट की विश्वसनीयता बनी रहती है।
फिलहाल, Arvind Kejriwal से जुड़े इस मामले में अगला कदम क्या होगा, यह पूरी तरह नई बेंच के गठन पर निर्भर करेगा। जस्टिस कारिया के हटने के बाद अब सबकी नजर Delhi High Court पर टिकी है, जहां से इस सस्पेंस का अगला अध्याय खुलना बाकी है।