दुनिया की दिग्गज टेक जाइंट और फेसबुक की पैरेंट कंपनी, Meta एक बार फिर बड़े लेवल पर छंटनी यानी “ले-ऑफ” की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्क जुकरबर्ग की कंपनी अपने ग्लोबल वर्कफोर्स से करीब 8,000 से ज्यादा की कर्मचारियों की छुट्टी कर सकती है। यह आंकड़ा कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 परसेंट है।
20 मई को गिर सकती है गाज
Meta इस छंटनी को 20 मई 2026 तक कर सकती है। कंपनी के अंदर चल रहे इस बड़े रीस्ट्रक्चरिंग का असर दुनिया भर में फैले इसके अलग-अलग डिपार्टमेंट्स पर पड़ना तय माना जा रहा है।

AI बना नौकरियों में कटौती का विलेन
Meta के इस शॉकिंग कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ कंपनी का बढ़ता झुकाव है। कंपनी अब अपना पूरा फोकस और पैसा ट्रैडिशनल सोशल मीडिया ऑपरेशंस से हटाकर AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर लगा रही है।

कंपनी उन रोल्स को खत्म कर रही है जो उसके फ्यूचरिस्टिक ‘AI-फर्स्ट’ विजन में फिट नहीं बैठते। Meta का टारगेट अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करना और एक छोटी लेकिन टेक-सैवी टीम के साथ काम करना है।
क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये इस साल का आखिरी ले-ऑफ नहीं होगा। कंपनी की अग्रेसिव स्ट्रेटजी को देखते हुए साल के आखिर तक और भी लोग पिंक स्लिप देख सकते हैं। चर्चा तो यह भी थी कि कंपनी 20% वर्कफोर्स कम करने वाली थी, जिसे फिलहाल 10% पर रोका गया है।
टेक वर्ल्ड में ‘अनिश्चितता’ का नया दौर
Meta का यह फैसला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी ग्लोबल टेक इंडस्ट्री के बदलते मूड को दिखाता है। Google, Amazon और Microsoft जैसी कंपनियां भी AI रेस में बने रहने के लिए अपने वर्कफोर्स में लगातार बदलाव कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स की राय
एक्सपर्ट्स का कहना है की कुल मिलाकर, Meta एम्प्लॉइज के लिए आने वाला महीना काफी मुश्किल भरा होने वाला है, क्योंकि कंपनी अपने ‘ईयर ऑफ एफिशिएंसी’ को अब नेक्स्ट लेवल पर ले जा रही है।