नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026 : संसद के विशेष सत्र में आज कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को Delimitation प्रक्रिया से जोड़कर सरकार महिलाओं की आकांक्षाओं को “बंधक” बना रही है।
थरूर ने अपने भाषण में इस कदम को “बार्ब्ड वायर में लिपटा हुआ तोहफा” बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण एक नैतिक जरूरत है और इसे बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
“महिला आरक्षण को तुरंत लागू करो”
लोकसभा में बोलते हुए थरूर ने साफ कहा कि महिला आरक्षण को Delimitation और जनगणना से जोड़ना बिल्कुल गलत है। उनके शब्दों में, “महिलाओं का हक तैयार है, इसे अभी लागू किया जा सकता है—इसे जटिल प्रक्रियाओं में क्यों उलझाया जा रहा है?”
उन्होंने सरकार से मांग की कि दोनों मुद्दों को अलग किया जाए और महिलाओं को उनका अधिकार तुरंत दिया जाए। कांग्रेस ने भी साफ किया कि वह महिला आरक्षण का पूरा समर्थन करती है, लेकिन इसे Delimitation से जोड़ना उचित नहीं है।
“Delimitation होगा राजनीतिक डीमोनेटाइजेशन”
थरूर ने Delimitation को “राजनीतिक डीमोनेटाइजेशन” बताते हुए चेतावनी दी कि इससे देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। उनका कहना था कि जिन दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट सकता है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा मिलेगा।
उन्होंने 2016 की नोटबंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि बिना पर्याप्त चर्चा और तैयारी के ऐसे फैसले देश को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सरकार की ओर से प्रस्ताव है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए और सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाए। इसी मुद्दे पर संसद में आज जोरदार बहस देखने को मिली और शाम तक मतदान होने की संभावना है।
थरूर के इस बयान ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक संतुलन के बीच चल रही बहस को तेज कर दिया है।