मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के कई अहम परमाणु ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। इन हमलों के बाद संभावित रेडिएशन रिसाव को लेकर आशंकाएं भी तेज हो गई हैं, जिससे व्यापक तबाही का खतरा जताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जिन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें Arak Nuclear Facility, Ardakan Nuclear Site, Isfahan Nuclear Facility, Natanz Nuclear Facility और Bushehr Nuclear Power Plant जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं। ये सभी स्थल लंबे समय से परमाणु गतिविधियों और यूरेनियम संवर्धन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं।
हमलों से आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई
आधी रात को हुए इन हमलों से कई शहरों और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन संयंत्रों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, तो रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इसका असर 20 से 500 किलोमीटर तक के दायरे में पड़ सकता है, जिससे ईरान के अलावा इराक, तुर्किये, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और खाड़ी देशों तक खतरा फैल सकता है।
अमेरिका और इज़राइल की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि ये हमले सीमित रणनीतिक उद्देश्य के तहत किए जा रहे हैं, जिनका मकसद ईरान पर दबाव बनाना है। हालांकि, लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है और हालात नियंत्रण से बाहर जाने की आशंका जताई जा रही है।
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब ईरान ने इज़राइल के Dimona Nuclear Facility को निशाना बनाने की कोशिश की। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला तेज हो गया। साथ ही यमन के हूती समूह की सक्रियता ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है, जिससे यह टकराव अब बहुस्तरीय रूप लेता दिख रहा है।
पिछले 24 घंटों में परमाणु ठिकानों के अलावा ईरान के मिसाइल बेस, हथियार भंडार, औद्योगिक इकाइयों और बंदरगाहों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। बंदर अब्बास के पास स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि भूमिगत परमाणु ढांचे को कितनी क्षति हुई है, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। इसका असर न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।