नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच इस समय दक्षिण एशिया में कूटनीतिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकाश की है वही दूसरी तरफ विपक्ष ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए प्रश्न किया है कि वर्ल्ड लीडर और विश्व गुरु बनने का ख्वाब देखने वाला भारत इस समय कहां है ? विपक्ष के अनुसार इस समय भारत को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी।
पाकिस्तान का ‘डिप्लोमैटिक कार्ड’
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के वक्त पाकिस्तान आपदा को अवसर बनाने में जुटा हुआ है । सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर वाशिंगटन से और पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री शाहबाज शरीफ इस समय तेहरान के संपर्क में बने हुए हैं ।
इसी बात को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है –
राहुल गाँधी का मानना है कि हमारी विदेश नीति compromised है । वहीँ जैराम रमेश का कहना है कि जब पडोसी देश इतनी महत्वपूर्ण भूमिका में निकलकर सामने आ रहा है तो मोदी सरकार चुप क्यों है ऐसे समय में वह महत्वपूर्ण भूमिका में उभरकर सामने आ सकते हैं।
सरकार का रुख: ‘सतर्कता ही समझदारी’
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर बेहद नापा तुला बयान दिया है । उन्होंने कहा है कि भारत चुप नहीं है बल्कि वह जिम्मेदार है । इस युद्ध का असर वैश्विक उर्जा सप्लाई चैन पर पड़ा है ।
हम परिस्थितियों को बारीकी से देख रहे हैं ।
हालांकि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोग बंटे हुए हैं । देखना होगा की आने वाले समय में पाकिस्तान की यह कोशोश कितनी सही होती है या सिर्फ मुन्गीरी लाल के हसीन सपने बनकर ही रह जाता है।