नई दिल्ली: इन दिनों कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक बयान खूब चर्चा में है। उन्होंने हाल ही में कहा कि रसोई में इस्तेमाल होने वाली गैस सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है और लोगों को इससे होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। बस, इतना कहना था कि सोशल मीडिया पर बहस और तंज का सिलसिला शुरू हो गया।
लोग पूछ रहे हैं — ये “गैस का ज्ञान” अचानक कैसे आ गया? और अगर गैस इतनी ही खतरनाक है, तो क्या अब घरों में इसका इस्तेमाल बंद हो जाएगा? या फिर यह सलाह सिर्फ जनता के लिए है, जबकि असल जिंदगी में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा?
कई यूजर्स ने चुटकी लेते हुए कहा कि “अगर नुकसान की बात करनी है, तो माइक का भी जिक्र कर लीजिए — जिस पर खड़े होकर ये सब बताया जा रहा है।” कुछ ने तो इसे “बयान की गर्म हवा” तक कह दिया।
आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान अक्सर असली मुद्दों से ध्यान हटाने का तरीका बन जाते हैं। उनका तर्क है कि अगर सच में स्वास्थ्य की चिंता है, तो इसके साथ ठोस जानकारी, रिसर्च और जागरूकता अभियान भी दिखना चाहिए, सिर्फ मंच से चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा।
वहीं समर्थक इसे एक सामान्य सलाह मानते हैं और कहते हैं कि स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी बात पर चर्चा होना जरूरी है, चाहे वह किसी भी मंच से आए।
कुल मिलाकर, गैस के नुकसान पर शुरू हुई यह चर्चा अब माइक, मैसेज और मकसद तीनों पर सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल, रसोई में गैस भी जल रही है और सोशल मीडिया पर तंज भी जारी है। अब देखना यह है कि यह बहस यहीं थमती है या इसमें और “गैस” भरी जाती है।