लखनऊ/वाराणसी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार सुर्खियों में हैं। दरअसल, हाल के दिनों में उनका टकराव सरकार से देखने को मिला है, जबकि विपक्ष भी उनके करीब बताया जा रहा है। इस बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बड़ा ऐलान किया है, जो सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
‘चतुरंगिणी सेना’ को लेकर नए विवरण सामने आए
अब सवाल है कि उन्होंने ऐसा क्या ऐलान किया है, जिसकी चर्चा जोरों पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने वाराणसी जिले में ‘चतुरंगिणी सेना’ बनाने की घोषणा की है। इतना ही नहीं, इसके लिए उन्होंने 27 सदस्यीय ‘चतुरंगिणी सभा’ का भी गठन किया है।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा घोषित ‘चतुरंगिणी सेना’ को लेकर नए विवरण सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, एक अक्षोहिणी चतुरंगिणी सेना में करीब 2 लाख 18 हजार सैनिक शामिल होंगे, जिनमें महिलाओं की भी भागीदारी रहेगी। ये सभी सदस्य अस्त्र-शस्त्र से लैस होंगे और संगठन में हर सनातनी की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
बताया गया है कि सेना के सदस्य फरसा, लाठी, तलवार और एयरगन जैसे हथियारों से सुसज्जित होंगे। इसका उद्देश्य साधु-संतों के साथ-साथ सामान्य सनातनी हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा करना बताया गया है। आगे चलकर इस सेना को गौ रक्षा के लिए भी विस्तारित करने की योजना बनाई गई है।
‘चतुरंगिणी सभा’ विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करती नजर आएगी
शंकराचार्य ने यह भी दावा किया है कि 27 सदस्यीय ‘चतुरंगिणी सभा’ अगले 10 महीनों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करती नजर आएगी और समाज में विश्वास व सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी।
उन्होंने संगठन के कामकाज के सिद्धांत को “टोको, रोको और ठोको” के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि आज के समय में भय के कारण कई लोग सच का साथ नहीं दे पाते। ऐसे में इस सेना का मुख्य उद्देश्य निर्बलों का सहारा बनना और समाज में न्याय स्थापित करना होगा।
अब सवाल उठता है कि चतुरंगिणी सेना का काम क्या होगा। इसे लेकर बताया गया है कि इस सेना को आगे चलकर गोरक्षा के उद्देश्य से विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह पहल हिंदू समाज में व्याप्त भय को दूर करने और सत्य के साथ खड़े होने का साहस पैदा करने के उद्देश्य से की जा रही है।