नई दिल्ली। मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। 28 फरवरी को United States और Israel ने Iran पर जोरदार बमबारी कर संघर्ष की शुरुआत कर दी। इस हमले में ईरान के कई शीर्ष कमांडर और बड़े नेताओं की मौत हो गई थी।
इसके बाद ईरान ने भी पलटवार तेज कर दिया है। हालात इस कदर तनावपूर्ण हैं कि ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस बार अमेरिका और इजरायल को कड़ी चुनौती देगा।
युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट माने जाने वाले Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है। यही वजह है कि वैश्विक बाजार और पश्चिमी देश चिंतित नजर आ रहे हैं।
इस बीच Donald Trump ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे पूरा देश अंधेरे में डूब सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर लगाया 20 लाख डॉलर का टोल
वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो वह खाड़ी देशों के पानी और बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा, जिससे क्षेत्र में बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
इतना ही नहीं, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर 20 लाख डॉलर (करीब 18.8 करोड़ रुपये) का ट्रांजिट शुल्क लगाने का फैसला किया है। ईरानी सांसद अलाएद्दीन बोरौजेर्दी के मुताबिक, यह कदम युद्ध की लागत को पूरा करने और क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने के लिए उठाया गया है।
Donald Trump लगातार सख्त रुख अपनाया
बता दे कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं और पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं। वहीं Israel भी अमेरिका के समर्थन से Iran पर हमले तेज किए हुए है।
दूसरी ओर, ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है, जिससे इजरायल और अमेरिका दोनों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
इस तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की जा रही है और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ रही है। इसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी पड़ता नजर आ रहा है, जहां निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।