तेहरान/टोक्यो, 21 मार्च 2026: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह जापान के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे सकता है—बस शर्त ये है कि जापान पहले तेहरान से समन्वय करे।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इंटरव्यू में कहा कि “हमने जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया है। यह खुला है, लेकिन दुश्मन देशों—अमेरिका और इजरायल—के जहाजों के लिए नहीं।”
जापान के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
जापान अपनी 90% से ज्यादा तेल जरूरतें मिडिल ईस्ट से पूरी करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह का तनाव सीधे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। दुनिया के कुल तेल ट्रांसपोर्ट का करीब 20% इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है, इसलिए यहां की स्थिति पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है।
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने “सेलेक्टिव ब्लॉकेड” लागू कर दिया था, जिससे कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। अब जापान को राहत देने का संकेत एशियाई बाजार के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
‘वेटिंग सिस्टम’ से मिलेगी एंट्री
ईरान अब एक नया “वेटिंग सिस्टम” लागू कर रहा है, जिसमें इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स जहाजों को क्लियरेंस देता है। हाल ही में भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति भी मिल चुकी है।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि उनकी बात हाल ही में तोशिमित्सु मोतेगी से हुई है और बातचीत जारी है।
फिलहाल, ईरान ने साफ किया है कि “न्यूट्रल” देशों के लिए रास्ता खुला रहेगा, लेकिन जिन देशों को वह हमलावर मानता है, उनके जहाजों पर पाबंदी जारी रहेगी।
हालांकि यह कदम राहत जरूर देता है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। तेल की कीमतें $100 के ऊपर बनी हुई हैं और विशेषज्ञ मानते हैं कि असली स्थिरता तभी आएगी जब युद्ध खत्म होगा।