मध्य पूर्व में जारी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है और लगातार भड़कती जा रही है। अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान को निशाना बना रहे हैं और उसके तेल भंडारों और रिहायशी इलाकों में बमबारी कर चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों की ज़िंदगी पर संकट पैदा हुआ है।
दूसरी ओर, ईरान पूरी तरह बौखला गया है और उसने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है, अब पड़ोसी देशों को भी टारगेट किया जा रहा है।अब तक ईरान केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन अब उसने तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना शुरू कर दिया है।
हाल ही में कतर की रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित बड़े एलएनजी (LNG) प्लांट पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई और उत्पादन रोकना पड़ा। यह हमला ऐसे समय हुआ जब इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब और यूएई को चेतावनी दी कि उनके ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक
CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर देशों में से एक है। इस प्लांट पर हमला होने से वैश्विक गैस और तेल की कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है।
भारत पर असर
- भारत अपनी गैस की लगभग 47% जरूरत कतर से आयात करता है।
- सालाना लगभग 27 मिलियन टन एलएनजी भारत लाता है, जिसमें से 12–13 मिलियन टन कतर से आता है।
- इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 24% और अमेरिका से लगभग 11% गैस आती है।
इससे स्पष्ट है कि मध्य पूर्व की बढ़ती जंग का सीधा असर भारत के ऊर्जा सुरक्षा और गैस कीमतों पर पड़ सकता है।