नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे बड़े संकट के बीच अब भारत की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की कथित लक्षित हत्या पर चुप्पी साधने को लेकर तीखा हमला बोला है।
सोनिया गांधी ने एक लेख में लिखा कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में खामेनेई की हत्या “गंभीर उल्लंघन” है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच एक बैठे हुए राज्य प्रमुख की हत्या है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने जैसा कदम है।
सोनिया ने यह भी याद दिलाया कि हत्या से करीब 48 घंटे पहले पीएम मोदी इजराइल दौरे पर थे और वहां उन्होंने इजराइल सरकार के प्रति “पूर्ण समर्थन” जताया था। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने ईरान के जवाबी हमलों की तो आलोचना की, लेकिन शुरुआती हमलों पर कुछ नहीं कहा।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित और नैतिक स्पष्टता वाली रही है, लेकिन अब वह संतुलन कमजोर पड़ता दिख रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संसद में खुली बहस की मांग की है।
दूसरी ओर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से बातचीत के बाद सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद किया। नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने अपने “महान मित्र” मोदी से बात की और इजराइल के साथ खड़े रहने के लिए आभार जताया।
इस बीच ईरान में खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद 40 दिन का शोक घोषित किया गया है। ईरान ने इन हमलों को “अपराध” करार दिया है और जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। भारत सरकार की ओर से अब तक सीधे तौर पर हत्या की निंदा नहीं की गई है, बल्कि क्षेत्र में संयम और तनाव कम करने की अपील की गई है।
कांग्रेस का कहना है कि यह चुप्पी भारत के सिद्धांतों से समझौता है, जबकि सरकार के सूत्रों का तर्क है कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सावधानी भरा रुख अपनाया जा रहा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच अब भारत की विदेश नीति को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।