मोहम्मद शमी का नाम सुनते ही साल 2023 का विश्व कप याद आ जाता है। ICC Cricket World Cup 2023 में भले ही टीम इंडिया खिताब जीतने में सफल नहीं हो पाई, लेकिन Mohammed Shami ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से विरोधी टीमों को दबाव में रखा। उनकी तेज़ और धारदार गेंदबाजी के सामने विश्व क्रिकेट के कई धाकड़ बल्लेबाज ढेर होते नजर आए।
हालांकि अब शमी भारतीय टीम से बाहर हैं और उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर पहले जैसा नहीं रहा, जिसके चलते उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा।
35 वर्षीय शमी ने घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन किया है। Ranji Trophy 2026 के सेमीफाइनल में 17 फरवरी को बंगाल और जम्मू-कश्मीर के बीच खेले गए मुकाबले में उन्होंने घातक गेंदबाज़ी करते हुए 90 रन देकर 8 विकेट झटके। अपने स्पेल में उन्होंने 3 मेडन ओवर भी डाले और बल्लेबाज़ों को क्रीज पर टिकने का कोई मौका नहीं दिया।
यह मुकाबला बंगाल क्रिकेट अकादमी ग्राउंड में खेला गया, जहां शमी की धारदार गेंदबाजी ने साफ संकेत दिया कि वह पूरी तरह फिट हैं और टीम इंडिया में वापसी के लिए तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर के खिलाफ लिया गया यह 8 विकेट का आंकड़ा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है।
इसके बावजूद उनका बाहर रहना कई सवाल खड़े करता है। प्रसिद्ध कृष्णा और आकाशदीप जैसे युवा गेंदबाज़ों के पास वह अनुभव नहीं है, जो शमी के पास है। मौजूदा कोच Gautam Gambhir और मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar की रणनीति पर भी चर्चा हो रही है कि आखिर अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ को लगातार क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
शमी अब तक भारत के लिए 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट ले चुके हैं। निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करते हुए वह तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखते हैं। ऐसे में सवाल यही है-क्या टीम इंडिया एक अनुभवी मैच विनर को लंबे समय तक नजरअंदाज कर सकती है?