पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 1995 के पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी से बिहार की राजनीति में ताव बढ़ गया है, जबकि दिल्ली में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है।
बिहार की स्थिति पर नजर डालें तो, गिरफ्तारी से पहले पप्पू यादव ने डिप्टी सीएम एवं गृह विभाग मंत्री सम्राट चौधरी पर जमकर निशाना साधा था। कुछ ही देर बाद पुलिस उनके ठिकाने पर पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, दिल्ली की राजनीति में इस मामले पर राहुल गांधी ने भी बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि पटना में NEET की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।
पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जाँच और न्याय की माँग की, तो वही पुराना भाजपा-NDA मॉडल सामने आ गया – केस को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।
इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए।आज उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही माँगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती।यह एक भयावह साज़िश और खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करती है, जहाँ और भी बेटियाँ शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आँखें मूँद कर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।
उधर प्रियंका गाँधी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि पटना के हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह केस सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है। FIR दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक – सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?
हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। इस केस में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव जी की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है।भाजपा और उनके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है- वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।