नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद में माइक बंद होने को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलता रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है, जिसके चलते सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी होती रही है।
हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भाषण के दौरान माइक बंद किए जाने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए जानबूझकर माइक बंद किया जाता है। वहीं, सत्ता पक्ष इस पर सफाई देते हुए इसे तकनीकी प्रक्रिया और सदन के नियमों का हिस्सा करार दे रहा है।
सदन में माइक का नियंत्रण किसके पास होता है?
संसद की कार्यवाही के दौरान माइक का नियंत्रण लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) या सदन की अध्यक्षता कर रहे पीठासीन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में होता है। हालांकि, स्पीकर स्वयं माइक का बटन नहीं दबाते।
स्पीकर के आसन के पास मौजूद तकनीकी टीम और संसद सचिवालय के अधिकारी उनके निर्देशों के अनुसार माइक को संचालित करते हैं। संसद की नियमावली के तहत, केवल उसी सदस्य का माइक चालू किया जाता है जिसे अध्यक्ष ने बोलने की अनुमति दी होती है।
जैसे ही अध्यक्ष किसी अन्य सदस्य का नाम पुकारते हैं या बोल रहे सदस्य को बैठने का निर्देश देते हैं, तकनीकी टीम तुरंत पिछले सदस्य का माइक बंद कर देती है।
माइक बंद होने से जुड़े नियम क्या कहते हैं?
लोकसभा की कार्यवाही के संचालन के लिए ‘प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम’ (Rules of Procedure and Conduct of Business) लागू हैं। माइक संचालन से जुड़े प्रमुख नियम इस प्रकार हैं—
अध्यक्ष की अनुमति: नियम 350 के तहत कोई भी सदस्य तभी बोल सकता है, जब उसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पुकारा जाए। यदि कोई सदस्य बिना अनुमति के खड़े होकर बोलने लगता है, तो उसका माइक चालू नहीं किया जाता।
असंसदीय भाषा: यदि कोई सदस्य असंसदीय भाषा का प्रयोग करता है या सदन की गरिमा के खिलाफ टिप्पणी करता है, तो अध्यक्ष उसे कार्यवाही से हटाने (Expunge) का आदेश दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में माइक बंद किया जा सकता है।
समय सीमा का पालन
हर दल को उसकी सदस्य संख्या के अनुपात में बोलने का समय दिया जाता है। समय समाप्त होने पर अध्यक्ष सदस्य को संकेत देते हैं और इसके बाद माइक स्वतः या निर्देशानुसार बंद कर दिया जाता है।
व्यवधान की स्थिति: यदि सदन में अत्यधिक शोर-शराबा हो और अध्यक्ष कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लें, तो अव्यवस्था रिकॉर्ड में न जाए—इसके लिए सभी माइक बंद कर दिए जाते हैं।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव का मुद्दा
विपक्ष के प्रमुख नेता राहुल गांधी और अखिलेश यादव माइक बंद होने को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताते रहे हैं। राहुल गांधी का आरोप है कि जब वे अडानी मुद्दे या जाति जनगणना जैसे संवेदनशील विषयों पर बोलते हैं, तब उनका माइक बंद कर दिया जाता है। उनका कहना है कि एक सांसद के रूप में उन्हें अपनी बात पूरी रखने का संवैधानिक अधिकार है।
वहीं, हाल ही में जब अखिलेश यादव सदन में बोल रहे थे और उन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में तीखी टिप्पणियाँ कीं, तो उनका माइक बंद कर दिया गया। अखिलेश यादव ने इसे सदन की गरिमा और सदस्यों के अधिकारों का हनन बताया।