शुक्रवार, 30 जनवरी को चांदी बाजार में ऐसा तूफान आया कि निवेशक हैरान रह गए। स्पॉट सिल्वर की कीमतें एक ही दिन में 37% तक टूट गईं, जो अब तक की सबसे बड़ी सिंगल-डे गिरावट मानी जा रही है। वहीं, सिल्वर फ्यूचर्स में 31% की गिरावट दर्ज हुई, जो मार्च 1980 के बाद का सबसे खराब दिन रहा। हफ्ते की शुरुआत में 120 डॉलर से ऊपर रिकॉर्ड स्तर छूने वाली चांदी गुरुवार रात एक ही सत्र में फिसलकर 84 डॉलर तक आ गई।
अमेरिका में चांदी से जुड़े ETF निवेशकों के लिए हालात और भी खराब रहे। ProShares Ultra Silver ETF में एक ही ट्रेडिंग सेशन में 60% की भारी गिरावट आई, जबकि iShares Silver Trust ETF 29% टूट गया। दोनों फंड्स के इतिहास में यह सबसे खराब दिन रहा।
इस तेज गिरावट के पीछे कई वजहें रहीं, लेकिन सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ा फैसला रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व फेड गवर्नर केविन वॉर्श को नया फेड चेयर नियुक्त किया। वॉर्श को केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का समर्थक और महंगाई पर सख्त रुख रखने वाला माना जाता है। उनकी नियुक्ति से यह संकेत मिला कि ब्याज दरों में आक्रामक कटौती शायद तुरंत न हो, जो सोना-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक खबर है।
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर में भी तेज मजबूती देखने को मिली। डॉलर इंडेक्स 97 के ऊपर पहुंच गया, जिससे कीमती धातुएं विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो गईं और मांग पर दबाव पड़ा।
तकनीकी स्तर पर भी बाजार पहले से काफी गर्म था। चांदी का RSI 80 के पार चला गया था, जो ओवरबॉट ज़ोन माना जाता है। ऊपर से हेज फंड्स और बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। मार्जिन बढ़ने और सट्टेबाजी पोजिशन की बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह करेक्शन अचानक आया है, लेकिन आगे भी चांदी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।