लखनऊ। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम नोज पर जाने से रोके जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह मामला अब सियासी रंग भी लेता नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं।
जवाब में स्पष्ट किया गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने अपने जीवनकाल में ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। 11 सितंबर 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ब्रह्मलीन हुए थे, जबकि 12 सितंबर 2022 को वैदिक विधि-विधान के अनुसार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विधिवत अभिषेक किया गया। इसके बाद सार्वजनिक समारोह में उन्हें शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।
जवाब में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस तथ्य की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई गई थी कि अभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश में इस तथ्य का उल्लेख दर्ज है। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि शंकराचार्य पद पर बने रहने को लेकर किसी भी न्यायालय द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है। जवाब में यह दावा भी किया गया है कि श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठ के शंकराचार्यों का उन्हें समर्थन प्राप्त है।
वसीयत को बताया गया वैध
जवाब में भारत धर्म महामंडल द्वारा मान्यता का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पंजीकृत वसीयत पूरी तरह वैध है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। यह जानकारी मेला प्रशासन को भेजे गए नोटिस के जवाब में दी गई है।
इसके अलावा, विरोधी पक्ष द्वारा दिए गए बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का वाद भी दायर किया गया था, जिसके बाद विरोधी पक्ष ने अपना आवेदन वापस ले लिया था।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर लगातार तरह-तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। इसी बीच उन्होंने मेला प्रशासन को आठ पन्नों का जवाब भेजते हुए खुद को शंकराचार्य बताया है। अपने जवाब में उन्होंने मेला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
इस पत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वे शंकराचार्य हैं और उन्हें संगम नोज जाने से रोकना अनुचित है।
साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर जारी किया गया नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो उनके पास कानूनी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।