नई दिल्ली: दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के मामले में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर अब तक का सबसे भारी जुर्माना लगा है। नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने इंडिगो पर कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है, जो किसी भी एयरलाइन पर लगाया गया रिकॉर्ड फाइन माना जा रहा है। इस कार्रवाई के पीछे दिसंबर की शुरुआत में हुआ वह ऑपरेशनल फेल्योर है, जिसने लाखों यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी थी।
DGCA की जांच में सामने आया कि उस दौरान इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स देरी से चलीं। हालात इतने बिगड़ गए कि कई एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी मच गई। चार सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि पायलटों के नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। इसके अलावा क्रू रोस्टरिंग में जरूरत से ज्यादा दबाव, पर्याप्त बैकअप न होना, कमजोर मैनेजमेंट निगरानी और सॉफ्टवेयर सिस्टम की खामियां भी इस संकट की बड़ी वजह रहीं।
DGCA ने छह गंभीर उल्लंघनों के लिए इंडिगो पर 1.80 करोड़ रुपये का एकमुश्त जुर्माना लगाया है। साथ ही, 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक 68 दिनों के लगातार गैर-अनुपालन के लिए 20.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फाइन लगाया गया, यानी रोज़ाना 30 लाख रुपये।
नियामक ने टॉप मैनेजमेंट पर भी सख्ती दिखाई है। इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स और COO इसिड्रे पोरकेरास को चेतावनी दी गई है, जबकि ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर के सीनियर VP जेसन हर्टर को पद से हटाने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, DGCA ने इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने को कहा है, जो सिस्टम में सुधार के बाद ही चरणबद्ध रूप से लौटाई जाएगी।
इंडिगो ने DGCA के आदेश स्वीकार करते हुए कहा है कि वह समयबद्ध तरीके से सुधारात्मक कदम उठाएगी। 65% घरेलू बाजार हिस्सेदारी वाली इस एयरलाइन के लिए यह मामला उसकी विश्वसनीयता और यात्रियों के भरोसे की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।