वाराणसी : काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य ने देशभर में सियासी हलचल तेज कर दी है। ऐतिहासिक चबूतरे और महारानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी संरचनाओं पर बुलडोजर चलने का वीडियो सामने आते ही मामला गरमा गया। बीते एक हफ्ते से जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर काशी को बदनाम करने का आरोप लगाया। सीएम योगी ने कहा कि मूर्तियां टूटने की खबरें पूरी तरह “सफेद झूठ” हैं और विकास के साथ-साथ विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।
कैसे शुरू हुआ मणिकर्णिका घाट विवाद
मणिकर्णिका घाट पर 18 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना चल रही है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में की थी। इस परियोजना का मकसद घाट पर इलेक्ट्रिक श्मशान, सामुदायिक शौचालय और हरित क्षेत्र विकसित करना है। 10 जनवरी 2026 को काम के दौरान जेसीबी से एक प्राचीन ‘मणि’ चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी संरचनाओं को हटाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों, पाल समाज और मराठा समुदाय ने विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने नारेबाजी की और मूर्ति व ऐतिहासिक संरचनाओं को फिर से स्थापित करने की मांग उठाई, जिसके बाद पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा।
सीएम योगी का जवाब और विपक्ष का हमला
सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कोई मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है और जो संरचनाएं हटाई गईं, उन्हें सुरक्षित निकालकर रखा गया है और बाद में पुनर्स्थापित किया जाएगा। सीएम ने काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह भ्रम फैलाया गया था। उन्होंने 2014 के बाद काशी में हुए विकास कार्यों, बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और हजारों करोड़ की परियोजनाओं का हवाला दिया।
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस घटना को “घोर पाप” बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर काशी की प्राचीन विरासत से खिलवाड़ किया जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसे सनातन विरासत का अपमान करार दिया। अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट और होलकर परिवार ने बिना सूचना के ध्वस्तीकरण का आरोप लगाते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। परियोजना जून 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है, लेकिन इस घटना ने काशी में एक बार फिर विकास और विरासत के बीच की बहस को तेज कर दिया है।