ईरान को लेकर लगातार ताजा अपडेट सामने आ रहे हैं। अब खबर है कि 26 वर्षीय गिरफ्तार प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी की फांसी पर रोक लगा दी गई है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से इस मामले में लगातार दबाव बनाए जाने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया है।
इस बीच ईरान की न्यायपालिका ने भी पहली बार आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट की है। न्यूज एजेंसी के हवाले से ईरान की न्यायपालिका ने सरकारी टीवी चैनल को दिए बयान में कहा कि इरफान सुल्तानी को गिरफ्तारी के बाद तेहरान के बाहर करज स्थित जेल में रखा गया है।
न्यायपालिका के मुताबिक, इरफान सुल्तानी पर ईरान की इस्लामी व्यवस्था के खिलाफ प्रचार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, बयान में साफ किया गया है कि उन्हें मौत की सजा नहीं दी गई है।
न्यायपालिका ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इरफान सुल्तानी दोषी पाए जाते हैं तो कानून के तहत उन्हें कारावास की सजा हो सकती है, क्योंकि इन आरोपों में मृत्युदंड का कोई प्रावधान नहीं है।
बता दे कि ईरान को लेकर अमेरिका लगातार सख्त बयान और धमकियां दे रहा है। वॉशिंगटन की रणनीति स्पष्ट मानी जा रही है-ईरान की मौजूदा सरकार को कमजोर कर वहां अपने अनुकूल सत्ता व्यवस्था स्थापित करना। हालांकि, हालिया घटनाक्रम ने अमेरिकी मंसूबों को बड़ा झटका दिया है।
ईरान में हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर मस्जिदों और इमाम बारगाहों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने ईरानी समाज को झकझोर दिया। शिया बहुल देश में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने से आम जनता के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या यह विरोध वास्तव में जनता की भावनाओं से जुड़ा है या इसके पीछे कोई और एजेंडा काम कर रहा है।
ईरान की राजनीति को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं ने आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। बड़ी संख्या में लोग यह मानने लगे कि कोई भी सच्चा मुस्लिम मस्जिदों और इमाम बारगाहों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। यही संदेश ईरान के सर्वोच्च नेता की ओर से भी इशारों में दिया गया, जिसके बाद सरकार के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर आए।