आज से हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास की शुरुआत हो गई है। सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करते ही ये विशेष समय आरंभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में खरमास को ऐसा काल माना जाता है, जब जीवन की रफ्तार को थोड़ा थामकर आत्मचिंतन और साधना पर ध्यान दिया जाता है,और किसी भी मांगलिक कार्य को करने से बचना चाहिए|
खरमास क्या होता है
खरमास हिंदू धर्म में माना जाने वाला एक विशेष काल होता है, जो तब शुरू होता है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। ये समय लगभग एक महीने तक रहता है और इसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास के मांगलिक कामों को रोक दिया जाता है।
खरमास करीब 30 दिनों तक चलता है और इसका समापन मकर संक्रांति के साथ होता है। इस दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय सूर्य और गुरु ग्रह की स्थिति शुभ कार्यों के लिए सही नहीं होती, इसलिए नए कार्यों की शुरुआत टाल दी जाती है।
हालांकि, ये समय पूरी तरह ठहरा हुआ रहने का नहीं है। खरमास के दौरान पूजा-पाठ, जप-तप और दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है। सूर्य देव की आराधना करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन में शांति बनी रहती है। जरूरतमंदों की मदद करना और दूसरों के लिए कुछ अच्छा करना भी इस काल में शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास व्यक्ति को सुख-सुविधाओं से थोड़ा दूर रखकर आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनने का अवसर देता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और संयम का पालन करते हैं, जिससे मन और शरीर दोनों को शुद्ध करने का अवसर मिलता है।
कुल मिलाकर, खरमास का ये समय हमें ये संदेश देता है कि जीवन में कभी-कभी रुकना भी जरूरी है। खरमास की ये अवधि धैर्य, साधना और आत्मशुद्धि की सीख देती है, ताकि मकर संक्रांति के बाद नए कार्यों की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ की जा सके।